नये साल में लगायें नया कैलेंडर, होंगे कई फायदे

उत्तर दिशा में कैलेंडर बढ़ाता है सुख-समृद्धि

पूर्णिया. वास्तु में पुराने कैलेंडर लगाए रखना अच्छा नहीं माना गया है। ये प्रगति के अवसरों को कम करता है. इसलिए, पुराने कैलेंडर को हटा देना चाहिए और नए साल में नया कैलेंडर लगाना चाहिए जिससे नए साल में पुराने साल से भी ज्यादा शुभ अवसरों की प्राप्ति होती रहे. नये साल को लेकर वास्तु विशेषज्ञ पंडित सूरज भारद्वाज ने खास तौर पर अगाह करते हुए कहा है कि अगर साल भर अच्छे योग और फायदे केलिए घर में कैलेंडर को वास्तु के अनुसार ही लगाया जाना लाजिमी है.

वास्तु अनुरुप कहां लगाएं कैलेंडर

कैलेंडर उत्तर,पश्चिम या पूर्वी दीवार पर लगाना चाहिए. हिंसक जानवरों, दुःखी चेहरों की तस्वीरोंवाला ना हो। इस प्रकार की तस्वीरें घर में नेगेटिव एनर्जी का संचार करती है. पं. श्री भारद्वाज बताते हैं कि पूर्व में कैलेंडर लगाना प्रगति के अवसर बढ़ा सकता है. पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य हैं, जो लीडरशिप के देवता हैं. इस दिशा में कैलेंडर रखना जीवन में प्रगति लाता है. लाल या गुलाबी रंग के कागज पर उगते सूरज, भगवान आदि की तस्वीरों वाला कैलेंडर हो तो बेहतर है.

उत्तर दिशा में कैलेंडर बढ़ाता है सुख-समृद्धि

पं. श्री भारद्वाज बताते हैं कि उत्तर दिशा कुबेर की दिशा है. इस दिशा में हरियाली,फव्वारा, नदी,समुद्र, झरने, विवाह आदि की तस्वीरों वाला कैलेंडर इस दिशा में लगाना चाहिए. कैलेंडर पर ग्रीन व सफेद रंग का उपयोग अधिक किया गया हो.

पश्चिम में लगाएं कैलेंडर, बनेंगे रुके हुए कार्य

इसी तरह पश्चिम दिशा बहाव की दिशा है. इस दिशा में कैलेंडर लगाने से कार्यों में तेजी आती हैं. कार्यक्षमता भी बढ़ती है. पश्चिम दिशा का जो कोना उत्तर की ओर हो, उस कोने की ओर कैलेंडर लगाना चाहिए.

दक्षिण दिशा में न लगाएं कैलेंडर

घड़ी और कैलेंडर दोनों ही समय के सूचक हैं. दक्षिण ठहराव की दिशा है. यहां समय सूचक वस्तुओं को ना रखें. ये घर के सदस्यों की तरक्की के अवसर रोकता है. घर के मुखिया के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.

मुख्य दरवाजे से दिखने वाला कैलेंडर न लगाएं

पं. श्री भारद्वाज बताते हैं कि मुख्य दरवाजे के सामने कैलेंडर नहीं लगाना चाहिए. इससे दरवाजे से गुजरने वाली ऊर्जा प्रभावित होती है, साथ ही तेज हवा चलने से कैलेंडर हिलने से पेज उलट सकते हैं जो अच्छा नहीं माना जाता है. अगर कैलेंडर में संतों महापुरुषों तथा भगवान के श्री चित्र लगे हों,तो ये और अधिक पुण्यदायी और आनंददायी माना जाता है.

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By AKHILESH CHANDRA

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