मैथिली व बांग्ला में नामांकन बढ़ाना पूर्णिया विवि की अहम चुनौती

मैथिली व बांग्ला में

पूर्णिया. अंग-बंग-मिथिला समेत नौ भाषाओं की धरती पूर्णिया में भाषा विषयों में उच्चतर शिक्षा हासिल करने की दिलचस्पी दिनोंदिन घटती जा रही है. आलम यह कि स्नातक में मैथिली और बांग्ला की कुछ सीटें ही भर पाती हैं. शेष बची हुई सीटों को आमतौर पर मानविकी संकाय के अन्य विषयों को समायोजित कर दिया जाता है. इस बार भी कुछ ऐसी ही स्थिति रहने की संभावना है. इसलिए मैथिली और बांग्ला में नामांकन बढ़ाना पूर्णिया विवि के लिए अहम चुनौती बन गयी है. वैसे मैथिली और बांग्ला में स्थायी प्राध्यापक और गेस्ट लेक्चरर दोनों कार्यरत हैं. हालांकि विद्यार्थियों की घोर कमी से समुचित वातावरण का निर्माण बाधित है. शोधपरक कार्य भी सीमित दायरे में चल रहे हैं. इस संबंध में पूर्णिया विवि के मानविकी संकाय के प्रथम डीन प्रो. गौरीकांत झा ने बताया कि मैथिली, बांग्ला जैसे विषयों में विद्यार्थियों की दिलचस्पी घटना काफी चिंताजनक है. वह भी पूर्णिया क्षेत्र में जहां दोनों भाषाएं बोलनेवालों की बहुलत है. प्रो. गौरीकांत झा का मानना है कि इसके पीछे मूल वजह माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर ही प्रयास में कमी है. माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर अगर काउंसलिंग हो तो अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में मैथिली, बांग्ला जैसे विषयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ सकती है. उन्होंने बताया कि जिस विषय में स्नातक है, उसी में पीजी कराने की व्यवस्था इसमें आड़े आ रही है. इसके साथ ही उन्होंने पूर्णिया विवि को सुझाव दिया है कि सीबीसीएस के तहत पीजी में वह किसी भी विषय में नामांकन लेने की सुविधा प्रदान करे.

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