पूर्णिया : शहर के मधुबनी चौक के समीप स्थित भगवान हनुमान का मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है. यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है, जबकि मंगलवार के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. धार्मिक मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना और मन्नत भगवान हनुमान अवश्य स्वीकार करते हैं.
हर मंगलवार उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
मंदिर में मंगलवार को विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं. भक्त सिंदूर, नारियल, फूल-माला और लड्डू चढ़ाकर भगवान हनुमान की आराधना करते हैं. सड़क किनारे स्थित होने के कारण यहां से गुजरने वाले लोग भी कुछ पल रुककर दर्शन करना नहीं भूलते.
मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं प्रसाद
स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर में भगवान हनुमान के समक्ष सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होने की मान्यता है. मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु दोबारा मंदिर पहुंचकर प्रसाद अर्पित करते हैं और भगवान का आभार व्यक्त करते हैं. यही विश्वास इस मंदिर को शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल करता है.
रामनवमी और हनुमान जयंती पर सजता है विशेष दरबार
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार रामनवमी और हनुमान जयंती के अवसर पर मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान, सुंदरकांड पाठ, भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन किया जाता है. इन अवसरों पर केवल मधुबनी ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्णिया शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार सहित यहां पहुंचते हैं. पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो जाता है.
करीब 80 वर्ष पुराना है मंदिर का इतिहास
मधुबनी स्थित इस हनुमान मंदिर का इतिहास लगभग 80 वर्ष पुराना बताया जाता है. स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार वर्ष 1945 के आसपास पीपल के पेड़ के नीचे एक झोंपड़ीनुमा मंदिर के रूप में इसकी स्थापना हुई थी. समय के साथ शहर का विस्तार हुआ और मंदिर का स्वरूप भी बदलता गया. आज यह एक भव्य मंदिर के रूप में स्थापित है, जहां प्रतिदिन सुबह और शाम नियमित पूजा एवं आरती होती है.
