बाढ़ के संभावित खतरे से लिए निबटने के लिए जिला प्रशासन अलर्ट, तैयारी पूरी

पूर्णिया जिले में बरसात के मौसम में परमान, कनकई और महानंदा नदियों के जलस्तर बढ़ने से हर साल बाढ़ और कटाव की स्थिति बनती है. बायसी अनुमंडल के कई इलाके सबसे अधिक प्रभावित रहते हैं. जिला प्रशासन ने इस बार पहले से ही कटावरोधी कार्य, राहत शिविर, नाव, मेडिकल टीम और अन्य आपदा प्रबंधन तैयारियां पूरी कर ली हैं.

पूर्णिया से रिपोर्ट :

46 स्थानों पर कराये गये कटाव एवं बाढ़ निरोधक कार्य

103 स्थायी एवं अस्थायी दल मेडिकल टीम में रहेंगे शामिल

पूर्णिया. जिले में अमूमन बरसात और उसके बाद के दिनों में विभिन्न नदियों के जल स्तर में बढ़ोत्तरी से हर वर्ष आसपास के ग्रामीण व निचले इलाकों में बाढ़ की संभावना बनी रहती है और कई बार इन नदियों में जल की अधिकता से बाढ़ आ भी जाती है. खासकर बायसी अनुमंडल के बैसा, अमौर और बायसी के इलाकों में अमूमन प्रत्येक वर्ष परमान, कनकइ, महानंदा जैसी नदियों के जलस्तर में बढ़ोत्तरी की वजह से बाढ़ आती है. बाढ़ के खतरों और इसकी संभावनाओं को देखते हुए नदियों से होने वाले कटाव और बाढ़ को रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ पूर्व की सारी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. कई स्थानों पर बांधों एवं नदियों के कटाव वाले क्षेत्रों का अनुमंडल पदाधिकारी एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा सर्वेक्षण कर वहां कटाव रोधी कार्य करवाये गये हैं. इसी क्रम में सिर्फ एक स्थान को छोड़कर सभी चिह्नित स्थानों पर कटाव रोधी कार्य संपन्न कराए जा चुके हैं. आपदा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार चिह्नित आश्रय स्थलों, मेडिकल टीम, नाव, सामुदायिक रसोई वगैरह से जुडी आवश्यकताओं के लिए भी व्यवस्था की जा चुकी है. इनमें पशुओं को ध्यान में रखते हुए उनके रहने और चारे की व्यवस्था भी शामिल हैं. जिले में एसडीआरएफ की टीम की भी लाइफ जैकेट एवं मोटरबोट के साथ तैनाती रहेगी.

सीमलबाड़ी को छोड़ शेष सभी स्थानों पर कटावरोधी कार्य संपन्न

सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी प्रणव कुमार ने बताया कि जिले में 14 कटावग्रस्त क्षेत्रों तथा 32 स्थानों पर बाढ़ निरोधात्मक सहित 46 स्थानों पर कटाव एवं बाढ़ निरोधक कार्य के अलावा 10 बाढ़ आश्रय स्थलों के निर्माण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है. सिर्फ एक स्थान सीमलबाड़ी में कार्य होना बाकी है जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा. जबकि सभी अंचलों में 307 ऊंचे शरण स्थलों का चयन कर लिया गया है. बाढ़ अवधि के दौरान मेडिकल टीम एवं मेडिकल कैम्प टीम गठित की गयी है. बाढ़ प्रभावित स्थानों में आवागमन के लिए नाव की मरम्मत और निजी नाव मालिकों के साथ एकरारनामा का कार्य करा लिया गया है. इनके अलावा शरण स्थलों पर शौचालय, चापाकल, पेयजल सुनिश्चित किये जा चुके हैं.

प्रभारी मंत्री करेंगे बाढ़ से पूर्व तैयारी की समीक्षा

मिली जानकारी के अनुसार आपदा विभाग के मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री रत्नेश सादा आज जिले के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. ऐसी उम्मीद की जा रही है कि बैठक में बाढ़ को लेकर प्रबंधन कार्यों की भी उनके द्वारा समीक्षा की जायेगी. इधर जिला प्रशासन ने विभिन्न नदियों अथवा गहरे जल श्रोत वाले स्थानों पर आमलोगों खासकर युवाओं और बच्चों से न जाने का अनुरोध किया है. साथ ही आगाह किया है कि बिना वजह अथवा रील बनाने के चक्कर में किसी भी प्रकार का जोखिम न लें अन्यथा किसी भी तरह की दुर्घटना हो सकती है.

बोले अधिकारी

फ्लड फाइटिंग को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह तैयार है. अमौर, बैसा, बायसी सहित 46 स्थानों पर कटाव रोधी एवं बाढ़ निरोधात्मक कार्य कराए गये हैं. जिले में 121 नाव, 850 लाइफ जैकेट्स, 14 मोटरबोट तथा 21765 पॉलीथीन शीट्स उपलब्ध हैं. सूखा राशन, पशुचारा, पॉलीथीन शीट्स आदि की निविदा करा ली गयी है. 307 शरण स्थलों के अलावा 10 बाढ़ आश्रय स्थलों का निर्माण करा लिया गया है. आवासन, सामुदायिक रसोई केंद्र संचालन, पेयजल, मेडिकल टीम एवं मेडिकल कैम्प टीम का भी गठन कर लिया गया है. इनमें चलंत दल, स्थायी दल एवं अस्थायी दल को मिलाकर कुल 103 दल शामिल हैं.

प्रणव कुमार,

सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी.

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लेखक के बारे में

Author: SATYENDRA SINHA

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