शीतलहर से थम गयी कारोबार की रफ्तार, मंदा हुआ बाजार

पिछले पांच दिनों से पूर्णिया समेत पूरे सीमांचल में धूप नहीं निकलने और प्रचंड ठंड के कारण अमूमन सभी ट्रेडों के कारोबार पर काफी असर पड़ा है.

मौसम में हुए बदलाव का सभी तरह के कारोबार पर दिख रहा असर

ऊनी व दवा के क्षेत्र को छोड़ सभी कारोबार में औसतन 40 फीसदी गिरावट

पूर्णिया. पिछले पांच दिनों से पूर्णिया समेत पूरे सीमांचल में धूप नहीं निकलने और प्रचंड ठंड के कारण अमूमन सभी ट्रेडों के कारोबार पर काफी असर पड़ा है. अगर देखा जाए तो हीटर, ऊनी कपड़े एवं दवा से संबंधित कारोबार को छोड़ सभी कारोबार में औसतन 40 फीसदी गिरावट आ गयी है. आलम यह है कि लगातार कोल्ड डे रहने के कारण सुबह खुलने वाली दुकानें दोपहर तक खुल रही हैं. दोपहर 12 बजे से शाम पांच-छह बजे के बीच कुछ ग्राहक किसी तरह आ जाते हैं. शाम छह के बाद बाजार से ग्राहक लगभग गायब ही हो जाते हैं. दुकानदारों की मानें तो कभी-कभी स्थिति ऐसी हो जाती है कि शाम तक बोहनी ही नहीं होती. शाम सात बजे के बाद तो यात्रियों की संख्या कम होने से ऑटो का परिचालन भी कम हो जा रहा है.

शहर के बाजारों में रेडीमेड कारोबार तो कड़क ठंड में लगभग ठप हो गया है. वैसे गर्म, ऊनी कपड़ों के बाजार में हल्की गर्माहट जरूर है, पर लहंगा-साड़ी एवं रेडीमेड कपड़ोंं का कारोबार मंदा चल रहा है. भट्ठा बाजार के जाने-माने रेडीमेड गारमेंट्स के कारोबारी सुरेंद्र नाहर बताते हैं कि पिछले एक पखवाड़े से ग्राहकी नदारद है. किसी तरह बोहनी हो जा रही है, पर इस ट्रेड में पूरी तरह मौसम की मार है. खुश्कीबाग के रेडीमेड दुकानदार राजकुमार का कहना है कि एक तो लोग पहले से महंगाई के कारण बंध गए हैं और फिर प्रचंड ठंड के कारण लोग घर से निकल ही नहीं रहे हैं, जिससे बाजार में ग्राहकों की संख्या और कम हो गयी है.

सब्जी बाजार को लगी ठंड

शहर के सब्जी बाजारों को भी ठंड लग गयी है. भट्ठा हाट हो या फिर खुश्कीबाग हाट, ग्राहकों के साथ-साथ सब्जी बेचने वालों की संख्या भी काफी कम हो गयी है. ठंड के कारण लोग बाजार जाने के बजाय चना और सोयाबीन की सब्जी बनाकर खा रहे हैं. दोनों सब्जी बाजारों में स्थायी दुकानदार ही जमे हुए हैं, जबकि गांवों से आने वाले विक्रेताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम हो गयी है. जहां तक कीमत की बात है, तो कीमत में कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ है. आलू-प्याज को छोड़कर कुछ सब्जियों की कीमतों में थोड़ी बहुत कमी ही आयी है.

सैलून में कम हो गए ग्राहक

शीतलहर के कारण सैलून में भी ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गयी है. ठंड बढ़ जाने से लोग न तो बाल बनवा रहे हैं और न ही दाढ़ी. और तो और, जिनके बाल सफेद भी हो गए हैं वे भी ठंड के कारण न तो बालों को डाई करा रहे हैं और न ही चेहरे पर मसाज कराने के लिए सैलून जा रहे हैं. हांसदा में सैलून का संचालन कर रहे गणेश कुमार ने बताया कि पहले दिन भर में 20-25 ग्राहक पहुंच जाते थे और तब सुबह उठते ही सैलून भी खोल लेते थे. अभी धूप नहीं निकल रही है और ठंड भी कड़ाके की पड़ रही है. सैलून दोपहर तक खोल रहे हैं, जिसमें दिन भर में मुश्किल से पांच-छह ग्राहक ही पहुंच रहे हैं. सैलून कारोबारियों की मानें तो हर साल जाड़े में कारोबार पर थोड़ा बहुत असर पड़ता ही है, लेकिन इस साल दिसंबर में कारोबार मंदा चल रहा है.

फुटपाथ दुकानदारों पर अतिक्रमण व ठंड का डबल अटैक

ठंड का यह मौसम फुटपाथ दुकानदारों के लिए भारी मुसीबत बन कर आया है. इन दुकानदारों पर डबल अटैक हो गया है. एक तो ठंड शुरू होते ही अतिक्रमण मुक्त अभियान का डंडा चल गया, जिससे पहले से चलती आ रही दुकानें अस्तव्यस्त हो गयीं. और जब किसी तरह चलता-फिरता कारोबार शुरू किया, तो शीतलहर की मार पड़ गयी. नतीजा यह निकला कि ठंड के कारण पिछले चार-पांच दिनों से ग्राहक ही नदारद हैं. नतीजतन, बिक्री इतनी कम हो रही है कि घर का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है. कई ठेले वालों ने ठेला चलाना बंद कर दिया है, जबकि कुछ ने चाय एवं अंडा बेचना शुरू कर दिया है.

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