दिल्ली के राजपथ पर पूर्णिया के कलाकार लहरायेंगे पूरे बिहार का परचम

गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस साल दिल्ली के राजपथ पर पूर्णिया की बेटियां दुनिया को बिहार के गौरव गान और नृत्य का जलवा दिखाएंगे.

कर्तव्यपथ पर करेंगे बिहार की लोक संस्कृति से जुडे ‘झिझिया’जैसे नृत्य का प्रदर्शन

दिल्ली के राजपथ पर नृत्य के बहाने दुनिया देखेगी पूर्णिया की कलाकारों का गौरव गान

कला भवन नाट्य विभाग के नेतृत्व में आज दिल्ली रवाना होगा कलाकारों का जत्था

पूर्णिया. गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस साल दिल्ली के राजपथ पर पूर्णिया की बेटियां दुनिया को बिहार के गौरव गान और नृत्य का जलवा दिखाएंगे. दिल्ली के कर्तव्यपथ पर बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए पूर्णिया के कलाकारों की टीम ‘झिझिया’ जैसे नृत्य का प्रदर्शन कर न केवल देश और दुनिया को बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक लोक संस्कृति की झलक दिखाएगी बल्कि बिहार में महिला जागरूकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान का अहसास भी दिलाएगी. कला भवन नाट्य विभाग के नेतृत्व में कलाकारों का यह जत्था गुरुवार को पूर्णिया से दिल्ली के लिए रवाना होगा जिसमें अमूमन सभी पूर्णिया की बेटियां हैं. यह अलग बात है कि देश की राजधानी दिल्ली के राजपथ पर अपने पूर्णिया की बेटियां पूरे बिहार का परचम लहरायेंगी.गौरतलब है कि भारत सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा गणतंत्र दिवस पैरेड कार्यक्रम के लिए पूर्णिया के कलाभवन नाट्य विभाग की टीम को बिहार के प्रतिनिधित्व का अवसर मिला है. इसके लिए बिहार कला पुरस्कार (भिखारी ठाकुर अवार्ड) से सम्मानित विश्वजीत कुमार सिंह के साथ 25 सदस्यीय टीम झिझिया की प्रस्तुति के लिए चयन किया गया है. कला भवन के कलाकार पहली बार दिल्ली के राजपथ गणतंत्र दिवस पर बिहार की लोक परंपरा झिझिया के साथ शामिल हो रहे हैं. इसमें से कुछ कलाकार पूर्व में राजपथ पर हिस्सा ले चुकी है और फिर बिहार से पूर्णिया के कला भवन पूर्णिया का दल वरिष्ठ रंगकर्मी विश्वजीत कुमार सिंह के नेतृत्व में झिझिया नृत्य की प्रस्तुति के साथ यह टीम राजपथ पर बिहार को प्रजेंट करेगी. वरिष्ठ रंगकर्मी विश्वजीत कुमार सिंह ‘ झिझिया’ टीम को लीड करेंगे. नृत्य के क्षेत्र में बिहार कला पुरस्कार से सम्मानित कलाकार अमित कुंवर पिछले एक माह से झिझिया नृत्य का प्रशिक्षण देते आ रहे हैं. टीम लीडर विश्वजीत सिंह छोटूने इस बाबत बताया कि देश के सभी राज्यों से दिल्ली के राजपथ पर 3000 कलाकारों के साथ बिहार से 50 कलाकार बिहार की सांस्कृतिक परंपरा का

प्रदर्शन करेंगे. बिहार यानी पूर्णिया से 25 कलाकार और पटना से 25 कलाकार इसमें शामिल हो रहे हैं.

इन कलाकारों के मिला है अवसर

पूर्णिया के कलाकारों की टीम में शामिल चांदनी शुक्ला, गरिमा कुमारी, प्रीति डे, उदय कुमार सिंह, रिया डे, रिंकल कुमारी, आकांक्षा निशु, दीप प्रिया, संजना कुमारी, काजल देवनाथ, सुप्रिया सरकार, अनामिका दास, समीक्षा डे, लखी प्रिया, स्नेहा झा, सपना कुमारी, कृपा राय, संजना दास, नेहा राज, भाषस्वाति कर्मकार, सुहानी भगत आगामी 26 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं अन्य देश के मुख्य अतिथियों के समक्ष ‘झिझिया’ जैसे बिहार के पारंपरिक लोक नृत्य की जीवंत प्रस्तुति देंगे. जिला कला सांस्कृतिक पदाधिकारी पंकज पटेल बुधवार को रिहर्सल में उपस्थित हुए और दिल्ली जा रहे कला भवन के तमाम कलाकारों का उत्साहवर्द्धन करते हुए उन्हें बधाई दी.

बिहार का एक पारंपरिक लोक नृत्य है झिझिया

अगर देखा जाये तो झिझिया बिहार के मिथिला क्षेत्र का एक पारंपरिक लोक नृत्य है, जो दशहरा के दौरान देवी दुर्गा को समर्पित है. इसमें महिलाएं सिर पर छेद वाले घड़े में जलता दीपक रखकर नाचती हैं और बुरी शक्तियों से रक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं. इसे ‘बिहार का गरबा’ भी कहते हैं. यह धार्मिक, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक है, यह लोक नृत्य बहुत लोकप्रिय है. नवरात्र के दौरान गांवों और पूजा पंडालों में कुंवारी कन्याएं और महिलाएं इस लोकनृत्य का प्रदर्शन करती हैं. झिझिया केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि बिहार की लोक आस्था, महिला जागरूकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है. यह परंपरा क्षेत्रीय लोक संस्कृति को सशक्त करती है. यह लोक नृत्य नवरात्रा में दस दिनों तक चलता है और छठ के समय भी यह लोकनृत्य इस क्षेत्र में पूरे उत्साह के साथ चलता है.

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By AKHILESH CHANDRA

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