गणतंत्र दिवस समारोह में कलाभवन के कलाकारों ने मचाया लोक नृत्य झिझिया का धमाल
पूर्णिया के कलाकारों को मिला देश की विभिन्न संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने का अवसर
पूर्णिया. गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर पूर्णिया के कलाकार इस बार बिहार की लोक संस्कृति की छाप छोड़ आए. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विदेश से आए मुख्य अतिथि एवं लाखों दर्शकों ने बिहार की लोक संस्कृति से जुड़ा झिझिया नृत्य का दीदार किया. वरिष्ठ रंगकर्मी एवं बिहार कला पुरस्कार से सम्मानित विश्वजीत कुमार सिंह के नेतृत्व में अपनी संस्कृति की छटा बिखेरने वाले कला भवन के कलाकारों का वापसी पर गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया. श्री सिंह ने बताया कि संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सौजन्य एवं संगीत नाटक अकादमी दिल्ली तथा नॉर्थ जॉन कल्चर सेंटर पटियाला के संयुक्त तत्वावधान में बंदे मातरम् गीतों को ओवरऑल क्रिएटिव डायरेक्टर डॉक्टर संध्या पूरेचा, चेयरपर्सन संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के साथ प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन एवं निधि घटेट, संगीत निर्देशन एम.एम. किरवानी, लिरिक्स सुभाष सहगल, वॉयस ओवर अनुपम खैर, कॉस्ट्यूम डिजाइन संध्या रमण ने किया.
वरिष्ठ रंगकर्मी एव टीम लीडर विश्वजीत कुमार सिंह ने बताया कि बंदे मातरम् गीतों पर पूरे भारत वर्ष से आए शास्त्रीय नृत्य कलाकार एवं लोक कलाकारों को अपने अपने राज्यों की संस्कृति को एक सूत्र में लेकर नृत्य को सफलता पूर्वक संतोष नेर कोरियोग्राफर ने इस नृत्य को सजाया. देश के दिग्गजों के बीच 2500 कलाकारों के साथ उनके नेतृत्व में गये कला भवन पूर्णिया के कलाकारों ने भाग लेकर बिहार की संस्कृति झिझिया को राष्ट्रीय फलक पर लाने का काम किया है. उन्होंने कहा कि इससे हमारी लोक संस्कृति की अलग पहचान बनी है.राष्ट्रीय परेड में भाग लेकर आए सभी कलाकार काफी खुश नजर आ रहे हैं. लगातार 20 दिनों तक दिल्ली में रहकर कर्तव्य पथ दिल्ली में देश के राष्ट्रपति एवं प्रधान मंत्री के समक्ष बिहार की लोक संस्कृति झिझिया का प्रदर्शन कर सभी गर्व महसूस कर रहे हैं. इन कलाकारों के प्रदर्शन के कारण आज पूर्णिया ही नहीं बिहार अपने आप को लोक संस्कृति पर गर्व कर रही है.