पूर्णिया. ज्ञानभारताम मिशन के अंतर्गत सर्वेक्षण कार्य को लेकर नव नालन्दा महाविहार के सहायक प्रोफेसर डॉ. तपस सरकार एवं डॉ. रूप नारायण भैना ने आर्टेटेरिया का भ्रमण किया. इस अवसर पर पूर्णिया के जिला कला पदाधिकारी पंकज पटेल भी उनके साथ थे. भ्रमण के दौरान टीम ने आर्टेटेरिया में संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों का गहन अवलोकन किया. यहां पांडुलिपियों की पर्याप्त संख्या के साथ-साथ उनके संरक्षण की एक नई एवं अभिनव शैली को देखा गया जिसमें पारंपरिक धरोहर को कला के माध्यम से संरक्षित किया जा रहा है.इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चित्रकार राजीव राज के कार्यों की विशेष चर्चा हुई. राजीव राज पिछले लगभग 25 वर्षों से कोसी पेंटिंग शैली को विकसित कर रहे हैं और निरंतर कला को नए-नए रूपों में प्रस्तुत करते आ रहे हैं. उनकी यह शैली आज देश-विदेश में विशेष पहचान बना चुकी है.विशेषज्ञों ने कहा कि राजीव राज द्वारा पांडुलिपि संरक्षण के क्षेत्र में एक अनूठा प्रयोग किया गया है. इस प्रकार कोसी पेंटिंग शैली में विकसित यह कला न केवल आधुनिक और रचनात्मक है, बल्कि पांडुलिपि संरक्षण की दिशा में एक नई सोच और नई विधा प्रस्तुत करती है.
ज्ञानभारताम मिशन के आर्टेटेरिया में कोसी पेंटिंग शैली का अवलोकन
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