धोबिया गीत पर थिरके कदम, सातवें दिन झिझिया-कजरी से सजा आम्रपाली प्रशिक्षण

पूर्णिया में आम्रपाली प्रशिक्षण कार्यक्रम के सातवें दिन प्रतिभागियों को धोबिया लोकगीत, झिझिया और कजरी लोकनृत्य का प्रशिक्षण दिया गया. यह कार्यशाला विलुप्तप्राय लोक विधाओं को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित की गई है.

पूर्णिया : कला एवं संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे 15 दिवसीय आम्रपाली प्रशिक्षण कार्यक्रम के सातवें दिन प्रेक्षागृह सह आर्ट गैलरी में प्रतिभागियों को पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्य का प्रशिक्षण दिया गया. इस दौरान धोबिया लोकगीत के साथ झिझिया और कजरी लोकनृत्य का अभ्यास कराया गया.

विलुप्तप्राय लोक विधाओं का हो रहा प्रशिक्षण

8 सितंबर तक चलने वाली इस नि:शुल्क कार्यशाला में प्रतिभागियों को झूमर, बारहमासा, चौमासा, कजरी, सोहर समेत अन्य विलुप्तप्राय लोक विधाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है. प्रशिक्षकों ने लोक विधाओं के पारंपरिक स्वरूप को संरक्षित रखने के साथ प्रतिभागियों को बेहतर मंचीय प्रस्तुति के गुर भी सिखाये.

नई पीढ़ी तक पहुंचेगी लोक संस्कृति

जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी पंकज कुमार पटेल ने बताया कि इच्छुक कलाकार और स्थानीय नागरिक आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र पहुंचकर नि:शुल्क पंजीकरण करा सकते हैं. उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार की समृद्ध लोक सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना है.

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लेखक के बारे में

By अरुण कुमार

अरुण कुमार प्रिंट माध्यम में 32 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर के पूर्णिया कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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