मक्का का खलिहान बन गया बायसी- बहादुरगंज स्टेट हाइवे, हादसे का खतरा

इस सड़क से प्रतिदिन हजारों लोग आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क पर फैले मक्का के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक बन गई है.

पूर्णिया के अमौर से सुनील कुमार की रिपोर्ट:

पूर्णिया: यह कोई खेत या खलिहान नहीं, बल्कि अमौर प्रखंड में बायसी से बहादुरगंज को जोड़ने वाला स्टेट हाईवे-99 है, जहां इन दिनों सड़क पर ही मक्का सुखाया जा रहा है. दिनभर किसान सड़क पर मक्का फैलाकर सुखाते हैं और शाम होने पर उसे हटाने के बजाय ढंककर वहीं छोड़ देते हैं.

इस सड़क से प्रतिदिन हजारों लोग आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क पर फैले मक्का के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक बन गई है.

सड़क पर जगह-जगह फैला मक्का

किसानों द्वारा सड़क के बीचोबीच मक्का फैलाकर बांस-बल्ले, ईंट और पत्थर से घेराबंदी कर दी जाती है, जिससे सड़क काफी संकरी हो गई है. बड़े वाहनों को निकलने में भी दिक्कत हो रही है और आमने-सामने से आने वाले वाहनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन बाइक सवार फिसलकर गिर रहे हैं. थोड़ी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है. रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि ढंके हुए मक्का और घेराबंदी साफ दिखाई नहीं देती.

प्रशासन ने कार्रवाई का दिया भरोसा

इस संबंध में बीडीओ राजाराम पंडित ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है. उन्होंने कहा कि थाना पुलिस के माध्यम से उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >