बिहार बना 'आमों का इंटरनेशनल हब', इस जिले में उगाए जाएंगे दुनिया के सबसे महंगे और मीठे आम

Mango In Bihar: बिहार के बगहा में अब दुनिया के सबसे महंगे और मीठे आम की खेती शुरू हो गई है. यहां के किसान कल्याण शुक्ला ने जापान के मियाजाकी और थाईलैंड के ब्लैक कस्तूरी आम की सफलतापूर्वक खेती कर इलाके को खास बना दिया है.

Mango In Bihar: भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है. आम का सीजन अब दस्तक देने वाला है. ऐसे में आम के सबसे मीठे और महंगे प्रजाति के बारे में जानना बेहद जरुरी है. जिस फल को हमारे देश में इतना पसंद किया जाता है उस फल की सबसे महंगी किस्म दुसरे देश में मिलती है. जापान में मिलने वाला मियाजाकी आम दुनिया का सबसे महंगा आम है. वहीं थाईलैंड की ब्लैक कस्तूरी आम को दुनिया का सबसे मीठा आम का दर्जा प्राप्त है. लेकिन अब दुनिया का सबसे मीठा और महंगा आम बिहार में भी मिलेगा. आइये जानते हैं बिहार में कहां उगाई जाएगी आम की ये किस्म.

बगहा में मिलेगा दुनिया का सबसे महंगा और मीठा आम

बगहा के मंगलपुर के किसान कल्याण शुक्ला ने जापान में होने वाले सबसे महंगे और थाईलैंड में होने वाले आम की सबसे मीठे प्रजाति के साथ-साथ दर्जनों प्रजाति के आम अपने बगीचे में लगाये हैं. कल्याण शुक्ला ने बताया की थाईलैंड का ब्लैक कस्तूरी मैंगो जामुनी रंग का होता है. ब्लैक कस्तूरी का पौधा आसानी से पहचाना जा सकता है क्योंकि इस पौधे के पत्ते और इसमें लगने वाले मंजर काले रंग के होते हैं. यह डायबिटीज रोगियों के लिए काफी लाभदायक है.

भारतीय बाजार में इस आम की कीमत 600 से 700 रुपये तक है. जापान का मियाजाकी आम दुनिया का सबसे महंगा आम है. यह आम दो से तीन लाख रुपये प्रति किलो बिकता है. यह गहरे लाल और जामुनी रंग का होता है. यह कई गुणों से भरपूर काफी मीठा आम होता है. उन्होंने बताया कि कोई भी रंगीन फल या सब्जी स्वास्थ्य के लिहाज से काफी फायदेमंद होती है.

5 लाख से ज्यादा होती है कमाई

किसान कल्याण शुक्ला ने 1 एकड़ जमीन में आम का बाग लगाया है और करीब डेढ़ एकड़ में लीची के पेड़ लगाए हैं. इन दोनों बागों से उन्हें हर साल करीब 5 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई हो जाती है. इसके अलावा वो खुद नर्सरी भी तैयार करते हैं और पौधे बेचते हैं. ऐसे में अब बिहार के लोगों को भी अच्छे और विदेशी किस्म के आम खाने का मौका मिल सकता है.

पहले चलाते थे पोल्ट्री फार्म

उन्होंने यह भी बताया कि पहले वो पोल्ट्री फार्म चलाते थे, लेकिन उसमें कोरोना के बाद उन्हें काफी नुकसान झेलना पड़ा. इसके बाद उनका रुझान धीरे-धीरे अध्यात्म की ओर हो गया और उन्होंने प्रकृति से जुड़ने का रास्ता अपनाया. इसी सोच के साथ उन्होंने कई साल पहले आम और लीची का बाग लगाना शुरू किया. फिर शौक बढ़ता गया और उन्होंने नर्सरी तैयार करना भी शुरू कर दिया.

(इंटर्न श्रीति सागर की रिपोर्ट)

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