Patna Student Protest : पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर चल रहे छात्र आंदोलन में अब सिर्फ युवा अभ्यर्थियों की कहानी नहीं है. यहां ऐसी महिलाएं भी आंदोलन में शामिल हैं, जिन्होंने नौकरी की उम्मीद में अपने छोटे-छोटे बच्चों तक को पीछे छोड़ दिया है. कोई दो साल से TRE-4 की तैयारी कर रही है, तो कोई तीन साल से शिक्षक बनने की राह देख रही है. शादी और बच्चे होने के बाद भी इन महिलाओं ने सरकारी नौकरी की तैयारी नहीं छोड़ी. अब ये सरकार से भर्ती प्रक्रिया में बदलाव और परीक्षा को लेकर अपनी मांगें पूरी करने की गुहार लगा रही हैं.
तीन साल से शिक्षक बनने की तैयारी, अब परीक्षा की मांग
आशा कुमारी ने बताया कि वह करीब तीन साल से शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रही हैं. उनके मुताबिक TRE-4 का नोटिफिकेशन समय पर नहीं आने से अभ्यर्थियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा. अब नोटिफिकेशन आने के बाद परीक्षा प्रक्रिया को लेकर नई परेशानी सामने आ गयी है.
आशा ने कहा कि वह अपने परिवार से दूर पटना में हॉस्टल में रहकर तैयारी कर रही हैं. परिवार का पूरा सहयोग मिलने के बावजूद लगातार लंबा संघर्ष उनके लिए आसान नहीं है. उनका कहना है कि सरकार जल्द परीक्षा आयोजित करे, ताकि वर्षों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को आगे बढ़ने का मौका मिल सके.
शादी के बाद भी नहीं छोड़ी तैयारी, ढाई साल से TRE-4 की तैयारी
मनीषा कुमारी भी करीब ढाई साल से TRE-4 की तैयारी कर रही हैं. शादी के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. उन्होंने कहा कि परिवार का पूरा समर्थन है और इसी वजह से वह आंदोलन में शामिल होकर अपनी मांगों के लिए आवाज उठा रही हैं.
मनीषा ने परीक्षा को लेकर एकल परीक्षा कराने और नेगेटिव मार्किंग हटाने की मांग की. उनका कहना है कि अगर अभ्यर्थी अपनी मांगों के लिए आवाज नहीं उठाएंगे, तो उनकी समस्याओं का समाधान कैसे होगा.
एक बच्चा छोड़कर आयीं थीं, अब तीन साल का हो गया
मधु कुमारी की कहानी आंदोलन में शामिल दूसरी महिलाओं से भी ज्यादा भावुक है. वह करीब दो साल से TRE-4 की तैयारी कर रही हैं. उन्होंने बताया कि जब वह पटना तैयारी करने आयीं थीं, तब उनका एक बच्चा करीब एक साल का था. अब वह बच्चा तीन साल का हो चुका है.
मधु के दो बच्चे हैं. एक बच्चा नानी के पास और दूसरा दादी के पास है. बच्चों से दूर रहकर वह पटना में तैयारी कर रही हैं. उनका कहना है कि वर्षों की तैयारी के बाद अब भर्ती प्रक्रिया सामने आयी है, लेकिन परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग और अन्य नियमों को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी है.
बच्चों को छोड़कर अपना भविष्य बनाने आये, लेकिन बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा
छपरा से आंदोलन में पहुंची एक महिला अभ्यर्थी ने कहा कि वह करीब दो साल से पटना आकर तैयारी कर रही हैं. छोटे-छोटे बच्चों को छोड़कर आंदोलन और पढ़ाई के लिए पटना में रहना उनके लिए आसान नहीं है.
उन्होंने कहा कि मां बच्चों की पढ़ाई और परवरिश में बड़ी भूमिका निभाती है. ऐसे में जब वह खुद बच्चों से दूर रह रही हैं, तो इसका असर उनके बच्चों पर भी पड़ रहा है. उन्होंने सरकार से अभ्यर्थियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की.
"जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं"
आंदोलन में शामिल महिलाओं का कहना है कि वे वर्षों से तैयारी कर रही हैं. शादी हो गयी, बच्चे हो गये, लेकिन सरकारी नौकरी की उम्मीद अब भी कायम है. उनका कहना है कि इतनी मेहनत और पढ़ाई के बाद अचानक तैयारी छोड़ देना संभव नहीं है.
अभ्यर्थियों ने कहा कि सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए. उन्होंने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराते हुए कहा- "जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं."
बच्चों से दूर मांएं, नौकरी की उम्मीद में लड़ रही लड़ाई
गर्दनीबाग में बैठीं इन महिला अभ्यर्थियों की कहानी बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के संघर्ष को दिखाती है. किसी की शादी के बाद तैयारी जारी है, तो कोई मां बनने के बाद भी किताबों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी हुई है.
इन महिलाओं का कहना है कि उनका संघर्ष केवल उनकी नौकरी के लिए नहीं है, बल्कि वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए भी लड़ रही हैं. अब उनकी नजर सरकार के अगले कदम पर है कि TRE-4 और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर उनकी मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है.