पटना से अजीत कुमार की रिपोर्ट
SUV Trap Case: रिश्वतखोरी के एक मामले में विशेष निगरानी न्यायालय, पटना ने हाजीपुर नगर थाना की तत्कालीन पुलिस अवर निरीक्षक (दारोगा) पूनम कुमारी को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. यह सजा विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) थाना के मामले में किसी दोषी को मिली पहली सजा है. विशेष न्यायाधीश (निगरानी) अतुल कुमार सिंह की अदालत ने विशेष वाद संख्या-17/2024 में यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया. यह मामला विशेष निगरानी इकाई थाना कांड संख्या-06/2024 से संबंधित है, जिसमें तत्कालीन महिला अधिकारी को कोर्ट ने कानून का उल्लंघन करने का दोषी पाया.
बस मुक्त कराने के एवज में मांगी थी रिश्वत
अभियोजन के अनुसार, घटना के समय पूनम कुमारी वैशाली जिले के हाजीपुर नगर थाना में पुलिस अवर निरीक्षक के पद पर तैनात थीं. उन पर आरोप था कि उन्होंने नितेश बस सर्विस के प्रबंधक पंकज कुमार द्विवेदी से उनकी जब्त बस संख्या BR-31P-5778 को मुक्त कराने के लिए जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) को अनुकूल अनुशंसा भेजने के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी. पीड़ित ट्रांसपोर्टर ने भ्रष्टाचार के सामने झुकने के बजाय इसकी लिखित शिकायत पटना स्थित विशेष निगरानी इकाई से कर दी थी.
आवास पर रिश्वत लेते हुई थीं गिरफ्तार
प्रबंधक से शिकायत मिलने के बाद विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने मामले का अपने स्तर से गुप्त सत्यापन कराया था. जांच में जब रिश्वत मांगने का आरोप पूरी तरह सही पाया गया, तब विभाग द्वारा 14 नवंबर 2024 को एक विशेष ट्रैप टीम का गठन कर कार्रवाई की गई. इस ट्रैप कार्रवाई के दौरान हाजीपुर स्थित महिला दारोगा के सरकारी आवास पर शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये की रिश्वत राशि लेते हुए उन्हें रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया था. पुलिस ने मौके से रिश्वत की पूरी रकम भी बरामद की थी.
14 गवाहों की गवाही के बाद मिली सजा
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से ही अभियुक्ता लगातार न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं. मामले के विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में कुल 14 गवाहों की गवाही कराई गई तथा अदालत के समक्ष अचूक दस्तावेजी एवं अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए. अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक (ट्रैप केस) विजय भानु उर्फ पुट्टू बाबू ने प्रभावी पैरवी की. प्रस्तुत पुख्ता साक्ष्यों एवं गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने पूनम कुमारी को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष जेल की सजा मुकर्रर की.
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