एकेयू में स्टेम सेल टेक्नोलॉजी, फिलॉसफी व एस्ट्रोनॉमी की शुरू होगी पढ़ाई

आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में शुक्रवार को 15वां स्थापना दिवस मनाया गया. इस अवसर पर आयोजित समारोह में भारतीय ज्ञान परंपरा और आर्यभट्ट के योगदान पर चर्चा हुई.

आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय ने मनाया 15वां स्थापना दिवस, नये स्कूल शुरू करने की घोषणा

संवाददाता, पटना

आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में शुक्रवार को 15वां स्थापना दिवस मनाया गया. इस अवसर पर आयोजित समारोह में भारतीय ज्ञान परंपरा और आर्यभट्ट के योगदान पर चर्चा हुई. कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शरद कुमार यादव, पीयू के पूर्व कुलपति प्रो रास बिहारी प्रसाद सिंह, सीआइएमपी के निदेशक प्रो राणा सिंह व सीआइएमपी के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कुमोद कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. कुलपति प्रो शरद कुमार यादव ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विकास और अकादमिक गतिविधियों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में पांच प्रमुख स्कूल संचालित हो रहे हैं. इसमें स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, स्कूल ऑफ ज्योग्राफिकल स्टडीज, स्कूल ऑफ रिवर स्टडीज, स्कूल ऑफ नैनोसाइंस एंड नैनोटेक्नोलॉजी, पाटलिपुत्र स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स शामिल हैं. विश्वविद्यालय वर्ष 2025-26 से तीन नये स्कूल ‘स्कूल ऑफ स्टेम सेल टेक्नोलॉजी’, स्कूल ऑफ फिलॉसफी, स्कूल ऑफ एस्ट्रोनॉमी शुरू करेगा. कुलपति ने विश्वविद्यालय के सभी स्कूलों को लघु शोध प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय सहायता देने की भी घोषणा की.

आर्यभट्ट के योगदान पर व्याख्यान

समारोह के मुख्य वक्ता पूर्व कुलपति प्रो रास बिहारी प्रसाद सिंह ने ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में आर्यभट्ट का योगदान’ विषय पर व्याख्यान दिया. उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली का आधार प्राचीन वेद-पुराणों में है, जो पूरी दुनिया के लिए मार्गदर्शक बने हैं. उन्होंने गुरुकुल परंपरा, रामायण, श्रीमद्भागवत गीता, उपनिषद और वेदों की महत्ता पर भी प्रकाश डाला. डॉ राणा सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की. समारोह में स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन के विद्यार्थियों द्वारा तैयार वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम के समापन पर परीक्षा नियंत्रक डॉ राजीव रंजन ने धन्यवाद ज्ञापित किया. कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न स्कूलों के संकायाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे. प्रमुख रूप से शामिल शिक्षाविदों में प्रो विद्यापति चौधरी, डॉ उदय राज मिश्र, डॉ मनीषा प्रकाश, डॉ राकेश कुमार सिंह, डॉ मनीष पराशर और डॉ साद असगर मोईनी शामिल थे.

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Author: ANURAG PRADHAN

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