Saristabad-Didarganj Elevated Road: राजधानी पटना में रोड कनेक्टिविटी को लगातार मजबूत किया जा रहा है. ऐसे में अब सरिस्ताबाद से दीदारगंज तक करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड और एट-ग्रेड रोड बनाने की तैयारी चल रही है. इस परियोजना की अनुमानित लागत 3,675 करोड़ रुपये है. इसके पूरा होने से न्यू बाइपास, अनीसाबाद, 90 फीट, भूतनाथ रोड या पहाड़ी मोड़ के पास जाम से काफी हद तक छुटकारा मिल सकेगा.
केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी का इंतजार
योजना को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा. अभी परियोजना का मूल्यांकन जारी है. केंद्र ने बिहार सरकार से लगभग 1,600 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी देने का अनुरोध किया है. इसमें सिविल निर्माण लागत का 25 प्रतिशत, राज्य जीएसटी, निर्माण सामग्री पर सीग्नॉरेज शुल्क और अन्य मदों का खर्च शामिल है.
क्या है इस परियोजना की खासियत?
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत होगी दीदारगंज से मीठापुर बस स्टैंड के पहले तक बनने वाला 7.51 किलोमीटर लंबा सिख्स लेन एलिवेटेड कॉरिडोर. इसके अलावा स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए दोनों ओर टोटल 21.84 किलोमीटर लंबा सर्विस रोड बनाया जाएगा, ताकि आसपास की कॉलोनियों के लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने में आसानी हो.
मॉडर्न ट्रैफिक व्यवस्था की भी सुविधा
सिर्फ एलिवेटेड रोड ही नहीं, बल्कि पूरी परियोजना मॉडर्न ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर तैयार की गई है. इसमें 10 एंट्री और एग्जिट रैंप, दो फ्लाईओवर, पटना-गया रेलवे लाइन पर आठ लेन का रोड ओवर ब्रिज (आरओबी), तीन छोटे पुल, चार लाइट व्हीकल अंडरपास और पांच किलोमीटर से अधिक लंबी नई जलनिकासी प्रणाली भी बनाई जाएगी. इससे ट्रैफिक के साथ-साथ पानी जमने की समस्या कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.
इस मॉडल के तहत बनेगी परियोजना
यह परियोजना हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल (HAM) के तहत बनाई जाएगी. इसके तहत सरकार शुरुआती 40 प्रतिशत राशि खर्च करेगी, जबकि बाकी की 60 प्रतिशत राशि निर्माण एजेंसी लगाएगी. बाद में सरकार संचालन और रख रखाव की अवधि के दौरान 15 सालों में ब्याज सहित यह राशि एजेंसी को लौटाएगी.
इन्हें मिलेगा मुख्य रूप से फायदा
इस सड़क का सबसे बड़ा फायदा न्यू बाइपास के किनारे रहने वाली 10 लाख से अधिक आबादी को मिलेगा. अभी भारी गाड़ियों की वजह से सड़क पार करना जोखिम भरा होता है और कई प्रमुख चौराहों पर दिनभर लंबा जाम लगा रहता है. नई परियोजना पूरी होने के बाद ट्रकों और अन्य भारी गाड़ियों की आवाजाही आसान, सफर का समय घटेगा, ईंधन की बचत होगी और रोजाना लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी. इस परियोजना से आने वाले सालों में पटना की ट्रैफिक व्यवस्था की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है.
