Samrat Choudhary: पटना में अगले साल से रावण दहन और रामलीला के कार्यक्रम के लिए जगह बदल जाएगी. अब गांधी मैदान में रावण दहन नहीं होगा. इसके लिए मरीन ड्राइव के पास अलग रामलीला मैदान तैयार किया जाएगा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को इसकी घोषणा की. सरकार के मुताबिक मार्च 2027 तक यह मैदान तैयार होकर हैंडओवर होने की उम्मीद है.
मुख्यमंत्री शनिवार को पटना के गांधी मैदान में जन्माष्टमी के अगले दिन हुए दही-हांडी सांस्कृतिक कार्यक्रम में पहुंचे थे. यहां उन्होंने बताया कि रामलीला समिति के लोगों ने पिछले साल सरकार से रावण वध के लिए अलग जगह देने की मांग की थी. इसके बाद सरकार ने अलग रामलीला मैदान बनाने का फैसला लिया.
सम्राट चौधरी ने कहा कि साल 1955 से गांधी मैदान में दुर्गा पूजा के दौरान रामलीला का मंचन और दशहरा के मौके पर रावण दहन होता आ रहा है. यानी करीब सात दशक से गांधी मैदान इस बड़े आयोजन का केंद्र रहा है.
मरीन ड्राइव के पास बनेंगे तीन बड़े मैदान
मुख्यमंत्री ने बताया कि मरीन ड्राइव के पास अगले साल मार्च तक तीन बड़े मैदान तैयार होने वाले हैं. इनमें से एक मैदान को रामलीला मैदान के नाम से विकसित किया जाएगा. इसी मैदान में रामलीला मंचन और रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने रामलीला समिति के लोगों को भरोसा दिया है कि नए मैदान में उनकी जरूरत के हिसाब से सभी जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसको लेकर पटना के डीएम को भी निर्देश दिया गया है. सम्राट चौधरी के अनुसार मार्च 2027 तक रामलीला मैदान बनकर सरकार को मिल जाएगा. इसके बाद वहां दूसरी जरूरी संरचनाएं भी तैयार की जा सकेंगी.
बाढ़ से बचाव के लिए नदियों के किनारे सड़क बनाने की योजना
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार में बाढ़ की समस्या को लेकर भी सरकार की योजना बताई. उन्होंने कहा कि नदियों से आने वाली बाढ़ से बचने के लिए उनके पानी को नियंत्रित करने की जरूरत है. इसके लिए सरकार ने पूरी योजना तैयार की है. केंद्र सरकार की मदद से गंगा, गंडक और कोसी जैसी बड़ी नदियों के पानी और बहाव को संभालने की योजना पर काम किया जा रहा है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा के दोनों किनारों पर बेसिन के पास सड़क बनाने की योजना है. इसके साथ ही वाटर ट्रांसपोर्टेशन यानी पानी के रास्ते यातायात शुरू करने की भी तैयारी है. सरकार का मानना है कि इससे बारिश के मौसम में नदी किनारे रहने वाले लोगों को बाढ़ की बड़ी तबाही से बचाने में मदद मिल सकती है.
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बक्सर से भागलपुर तक बढ़ जाता है गंगा का पानी
सम्राट चौधरी ने गंगा में बढ़ते पानी की स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि जब गंगा बक्सर के रास्ते बिहार में प्रवेश करती है, तब इसमें करीब 14 हजार क्यूसेक पानी होता है. लेकिन भागलपुर से आगे निकलने तक पानी की मात्रा करीब चार गुना ज्यादा हो जाती है.
उन्होंने कहा कि गंडक और कोसी नदियों के जरिए नेपाल से भी बड़ी मात्रा में पानी बिहार में आता है. इसकी वजह से नदी किनारे बसे इलाकों में बारिश और बाढ़ के दौरान काफी नुकसान होता है. सरकार इसी समस्या को ध्यान में रखकर नदियों के बेहतर प्रबंधन और बाढ़ से बचाव की योजना पर काम कर रही है.
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