Patna News : बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य किये जाने के विरोध में सिविल सर्जन कार्यालय में मांग पत्र सौंपा है. संघ के नेता अमित मिश्रा और दिनेश कुमार ने कहा कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में 24x7 स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रखने के बीच महिला स्वास्थ्यकर्मियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति को लेकर जारी नया आदेश व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर रहा है.
सिविल सर्जन ने सचिव को भेजा पत्र
पटना के सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने भी स्वास्थ्य विभाग के सचिव को पत्र भेजकर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत महिला स्वास्थ्यकर्मियों की परेशानियों से अवगत कराया है. 18 अगस्त 2026 को भेजे गये पत्र में बायोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर मानदेय भुगतान से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया गया है.
पत्र में कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग की सेवाएं आपातकालीन व्यवस्था के तहत 24x7 संचालित होती हैं. विभागीय पदाधिकारियों और कर्मियों की सामान्य कार्यालय अवधि सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक है, जबकि स्वास्थ्य संस्थानों में ड्यूटी रोस्टर के अनुसार चौबीसों घंटे सेवाएं जारी रहती हैं.
कई केंद्रों पर 15 हजार आबादी का दबाव
पत्र के अनुसार स्वास्थ्य उपकेंद्रों को करीब पांच हजार की आबादी के लिए संचालित किया जाना चाहिए, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के कई उपकेंद्रों पर 10 से 15 हजार तक की आबादी का दबाव है. वहीं, करीब 70 से 75 प्रतिशत स्वास्थ्य उपकेंद्रों के पास अपना भवन तक उपलब्ध नहीं है. कई केंद्रों पर शौचालय और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है.
ऐसी परिस्थितियों में महिला स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी की अनिवार्यता को व्यावहारिक रूप से लागू करने में कठिनाइयां आने की बात कही गयी है.
अस्पताल सरकारी कार्यालय की तरह नहीं चलते
संघ नेताओं ने कहा कि अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र सामान्य सरकारी कार्यालयों की तरह संचालित नहीं होते. यहां पदाधिकारियों और कर्मचारियों को ड्यूटी रोस्टर के अनुसार काम करना पड़ता है और आपातकालीन परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करानी होती हैं.
संघ ने सरकार से ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बायोमेट्रिक हाजिरी संबंधी व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है.
