ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत पर आया तेजस्वी की पार्टी का बयान, कहा- भारत ने अपना एक दोस्त खो दिया

Iran USA Conflict: इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की पुष्टि हुई है. तेहरान समेत कई इलाकों में बमबारी के बाद ईरान ने 40 दिन का शोक घोषित किया. भारत में आरजेडी ने इस कार्रवाई की आलोचना की है.

Iran USA Conflict: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध जारी है. 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर बमबारी की. इस हमले में स्कूलों को भी निशाना बनाया गया. इससे भारी तबाही हुई. 1 मार्च की सुबह ईरान की सरकारी मीडिया ने इस बात की ऑफिसियल पुष्टि कर दी कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की इस हमले में मौत हो गई है. खामेनेई के निधन के बाद पूरे ईरान में 40 दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की गई है.

मानवता के खिलाफ है यह हमला- राजद

इस बड़ी घटना पर बिहार की प्रमुख राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है. आरजेडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की. पार्टी ने लिखा कि अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत के साथ ही भारत ने अपना एक भरोसेमंद और पुराना दोस्त खो दिया है. आरजेडी ने कहा कि खामेनेई को निशाना बनाकर किया गया यह हमला सिर्फ एक देश पर नहीं, बल्कि पूरी मानवता के खिलाफ अपराध है.

आरजेडी ने अपने पोस्ट में अमेरिका की विदेश नीति पर हमला बोला. पार्टी ने कहा कि अमेरिका ने अतीत में इराक, लीबिया और सीरिया जैसे देशों पर हमले करके वहां के नागरिकों का जीवन पूरी तरह बर्बाद कर दिया है और अब वही पैटर्न ईरान में दोहराया जा रहा है. हमले में हजारों निर्दोष लोगों की जान जाने पर पार्टी ने गहरा दुख जताया है.

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भारत में भी गुस्सा

इस हमले में खामेनेई के परिवार के चार सदस्य भी मारे गए हैं. इसमें उनकी बेटी, पोता और दामाद शामिल हैं. इस खबर के सामने आने के बाद भारत के मुस्लिम समुदाय में भी जबरदस्त गुस्सा देखा जा रहा है. देश के विभिन्न हिस्सों में लोग इजरायल और अमेरिका की इस कार्रवाई के खिलाफ विरोध कर रहे हैं. इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बता रहे हैं.

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Published by: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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