पटना में बारिश-उमस का असर, वायरल फीवर के मरीज 40% तक बढ़े; बच्चों में गले का संक्रमण बढ़ा

राजधानी में बारिश और उमस के कारण वायरल फीवर, फ्लू और गले के संक्रमण के मरीजों की संख्या में 30-40% की बढ़ोतरी हुई है. खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. डॉक्टर आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दे रहे हैं.

Patna Seasonal Illnesses: राजधानी में लगातार हो रही बारिश, उमस और तापमान में उतार-चढ़ाव का असर लोगों की सेहत पर साफ दिखने लगा है. पीएमसीएच, एनएमसीएच, आईजीआईएमएस और न्यू गार्डिनर समेत सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में वायरल फीवर, फ्लू और गले के संक्रमण के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है. डॉक्टरों के अनुसार पिछले दो-तीन सप्ताह में ऐसे मरीजों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

वायरल फीवर और फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ी

अस्पतालों में तेज बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द, खांसी, नाक बहना और छींक की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं. बच्चों में गले में दर्द और टॉन्सिल संक्रमण के मामले अधिक सामने आ रहे हैं.

पांच साल से कम उम्र के बच्चे सबसे ज्यादा संवेदनशील

पीएमसीएच के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कौशलेन्द्र कुमार ने बताया कि मौसम में लगातार बदलाव के कारण वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है. इसकी चपेट में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक आ रहे हैं, लेकिन पांच साल से कम उम्र के बच्चे और 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग सबसे अधिक संवेदनशील हैं.

बुखार उतरने के बाद भी बनी रह सकती है खांसी

आईजीआईएमएस के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. गोविन्द कुमार ने बताया कि अधिकांश वायरल संक्रमण कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन बुखार उतरने के बाद भी खांसी और कमजोरी कुछ समय तक बनी रह सकती है. ऐसे में मरीजों को पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना चाहिए. यदि लगातार बुखार, अधिक सुस्ती या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

बच्चों में टॉन्सिल संक्रमण के बढ़े मामले

विशेषज्ञों के अनुसार वायरस या बैक्टीरिया से होने वाले टॉन्सिलाइटिस में गले में तेज दर्द, बुखार और खाना निगलने में परेशानी होती है. टॉन्सिल लाल और सूजे हुए दिखाई देते हैं. कुछ मामलों में सफेद परत भी बन जाती है. स्कूल जाने वाले बच्चों में आपसी संपर्क के कारण संक्रमण तेजी से फैल सकता है.

हर गले के संक्रमण में एंटीबायोटिक जरूरी नहीं

डॉक्टरों का कहना है कि टॉन्सिलाइटिस वायरस और बैक्टीरिया दोनों से हो सकता है. वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक असर नहीं करती. इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह कोई भी एंटीबायोटिक दवा शुरू नहीं करनी चाहिए. जांच और लक्षणों के आधार पर ही उपचार तय किया जाता है.

क्या करें और क्या न करें

क्या करें

  • पर्याप्त पानी और अन्य तरल पदार्थ का सेवन करें.
  • पर्याप्त आराम करें.
  • खांसते और छींकते समय मुंह-नाक ढकें.
  • हाथों की नियमित सफाई रखें.
  • बच्चों के गिलास और बोतल अलग रखें.
  • तेज बुखार, निगलने या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

क्या न करें

  • बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक का सेवन न करें.
  • दवा बीच में बंद या खुद से न बदलें.
  • तौलिया, गिलास और बोतल साझा न करें.
  • बीमार बच्चे को स्कूल न भेजें.
  • तेज बुखार या सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर शिकायतों को नजरअंदाज न करें.

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By आनंद तिवारी

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