पीएमसीएच की बढ़ी 50 सीटों पर संकट, फैकल्टी की कमी, क्लासरूम-लाइब्रेरी समेत इंफ्रास्ट्रक्चर की घोर अभाव

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में फैकल्टी की भारी कमी से एमबीबीएस की 50 सीटों और मरीजों के इलाज पर संकट गहरा गया है। जानें पूरी रिपोर्ट।

PMCH Patna : पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में एमबीबीएस की बढ़ी 50 सीटों पर संकट के बादल गहराने लगे हैं. इसके पीछे दो प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं. पहला फैकल्टी शिक्षकों की कमी और दूसरा इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लासरूम एवं लाइब्रेरी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव. हाल ही में पीएमसीएच में एमबीबीएस की सीटें 150 से बढ़ाकर 200 की गयी हैं, लेकिन बढ़ी सीटों के अनुरूप जरूरी संसाधन अभी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं.

एनएमसी ने कमियां दूर करने का दिया निर्देश

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने पीएमसीएच में फैकल्टी की संख्या बढ़ाने के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने का निर्देश दिया है. इसके बाद अस्पताल प्रशासन व्यवस्था सुधारने में जुटा है. हाल के दिनों में एनएमसी की ओर से पीएमसीएच, एनएमसीएच समेत प्रदेश के सात मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में एमबीबीएस की 50-50 सीटें बढ़ायी गयी थीं.

589 में 203 फैकल्टी पद खाली

पीएमसीएच में कुल 589 फैकल्टी पद स्वीकृत हैं, जबकि 386 डॉक्टर ही कार्यरत हैं. 203 पद रिक्त हैं. प्रोफेसर के 96 पदों में 38, एसोसिएट प्रोफेसर के 175 में 101 और असिस्टेंट प्रोफेसर के 318 में 247 पद खाली हैं. असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर पर सबसे अधिक कमी है.

इसके अलावा ट्यूटर/डिमॉन्स्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट के 229 स्वीकृत पदों में भी 110 पद रिक्त हैं. फैकल्टी की कमी से मेडिकल शिक्षा के साथ मरीजों के इलाज पर भी दबाव बढ़ रहा है.

60 बेड के बर्न वार्ड में एक एसोसिएट प्रोफेसर

पीएमसीएच के बर्न विभाग में 60 बेड का वार्ड है, जहां राज्यभर से गंभीर रूप से झुलसे मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. विभाग में महज एक एसोसिएट प्रोफेसर के कार्यरत होने की बात सामने आयी है.

एक वरिष्ठ शिक्षक पर मरीजों के इलाज के साथ आठ पीजी डॉक्टरों की ट्रेनिंग की जिम्मेदारी भी है. बर्न मरीजों को लगातार निगरानी और विशेषज्ञ इलाज की जरूरत होती है. ऐसे में फैकल्टी की कमी से इलाज और प्रशिक्षण दोनों पर दबाव बढ़ रहा है.

सर्जरी में पांच की जगह दो प्रोफेसर

सर्जरी विभाग में प्रोफेसर के पांच पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल दो प्रोफेसर कार्यरत हैं. जटिल ऑपरेशन और गंभीर मरीजों की संख्या को देखते हुए वरिष्ठ सर्जनों की कमी चुनौती बनी हुई है.

स्किन विभाग में प्रोफेसर का पद खाली बताया गया है. रेडियोलॉजी, चेस्ट एवं रेस्पिरेटरी मेडिसिन, एनेस्थीसिया, ईएनटी, पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी समेत कई विभागों में भी फैकल्टी की कमी है.

प्रोफेसर के 38 पद रिक्त

पीएमसीएच में प्रोफेसर के 96 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 58 पर डॉक्टर कार्यरत हैं और 38 पद खाली हैं. यानी करीब 40 फीसदी पद रिक्त हैं. मेडिसिन के अलावा एनेस्थीसिया, ऑर्थोपेडिक्स, ईएनटी, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, कम्युनिटी मेडिसिन और फिजियोलॉजी में भी अलग-अलग स्तर पर पद खाली हैं.

रोज तीन हजार से ज्यादा मरीज, बढ़ा दबाव

पीएमसीएच की ओपीडी और इमरजेंसी में प्रतिदिन तीन हजार से अधिक मरीज पहुंचते हैं. इनमें बड़ी संख्या गंभीर और रेफर मरीजों की होती है. मेडिसिन, सर्जरी, बर्न, चेस्ट और रेडियोलॉजी जैसे विभागों पर सबसे अधिक दबाव रहता है. मरीजों की संख्या और उपलब्ध वरिष्ठ डॉक्टरों के बीच बढ़ता अंतर अस्पताल प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है. जटिल मामलों में विशेषज्ञ राय, इमरजेंसी सुपरविजन और पीजी डॉक्टरों की निगरानी बेहद जरूरी होती है.

जल्द दूर होंगी फैकल्टी की कमियां

पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार पीएमसीएच में नयी सुविधाएं बढ़ायी जा रही हैं. बिल्डिंग के साथ उपकरण आदि भी उपलब्ध करा दिये गये हैं. जिन विभागों में फैकल्टी और डॉक्टरों की कमी है, वहां की कमियों को भी जल्द दूर किया जायेगा.

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By आनंंद तिवारी

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