पटना के कॉलेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ-साथ अपनी हॉबी को बना रहे करियर

वीमेंस कॉलेज की छात्राएं पहले कॉलेज के करिकुलर एक्टिविटीज से जुड़ती हैं, फिर अपने हुनर को निखारती हैं. वहीं कुछ छात्राएं अपने सीखे हुनर को दूसरों तक पहुंचाने का कार्य करती हैं.

पटना के कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं आजकल अपनी पढ़ाई के साथ-साथ हुनर को इनकम का जरिया बना रहे हैं. इससे किसी को पॉकेट मनी, तो किसी को आर्थिक मदद मिल रही है. वे इस दौरान नॉलेज के साथ अपनी जिंदगी के फैसले लेना तो सीख ही रहे हैं, भविष्य के लिए भी खुद को तैयार कर रहे हैं. ऐसे में वीमेंस कॉलेज की छात्राएं पहले कॉलेज के करिकुलर एक्टिविटीज से जुड़ती हैं, फिर अपने हुनर को निखारती हैं. वहीं कुछ छात्राएं अपने सीखे हुनर को दूसरों तक पहुंचाने का कार्य करती हैं. इनमें कई छात्राएं ऑर्डर पर भी चीजें तैयार करती हैं. जिसकी बाजार में खूब डिमांड हो रही है और उसे बेचकर वे अच्छा खासा पैसा कमा रही हैं.

टिकुली में दक्ष देशज राज्य शिल्प सम्मान मिल चुका है
कला एवं शिल्प विद्यालय की ममता कुमारी फाइन आर्ट्स की पढ़ाई कर रही हैं. आर्ट्स में रुचि थी, तो उन्होंने टिकुली कला को सीखा. वे पिछले चार साल से इस कला से जुड़कर कार्य कर रही हैं. वे कहती हैं, जब आप घर से दूर रहती हैं, तो आपको आर्थिक दिक्कतें आती हैं. ऐसे में मैंने जब टिकुली आर्ट सीखा तो मुझे धीरे-धीरे ऑर्डर मिलने लगे.  मैं टी कोस्टर, पेंटिंग, कैनवास आदि तैयार करती हूं. महीने के मुझे 6-7 हजार रुपये मिलते हैं. इसी साल मुझे इस कला के लिए दक्ष देशज राज्य शिल्प सम्मान से सम्मानित भी किया गया है.

मधुबनी पेंटिंग और टिकुली आर्ट तैयार करती हैं कामिनी
जेडी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की छात्रा कामिनी कुमारी पढ़ाई के साथ पेंटिंग में रुचि रखती हैं. एक वर्कशॉप के दौरान उन्हें मधुबनी और टिकुली पेंटिंग सीखने का मौका मिला. शुरुआत में बस पेंटिंग्स बनाकर लोगों को गिफ्ट किया करती थी. सोशल मीडिया पर भी शेयर करती थी. जहां से वर्कशॉप सीखा था वहां से पहली बार कॉल आया और ऑर्डर भी मिला. काम उन्हें पसंद आया तो मुझे ज्यादातर ऑर्डर वहीं से मिलते हैं. पढ़ाई के साथ-साथ मैं महीने के 4-5 हजार रुपये कमा लेती हूं. इससे खुद का खर्च निकालना आसान हो गया है.

घर से मिलने वाले पैसे अब नहीं लेती
कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आर्ट्स एंड साइंस में बीबीएम सेकंड इयर की पढ़ाई कर रही रितिका कुमारी बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही आर्ट में रुचि रखती थी. कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्हें उनकी दोस्तों से पता चला कि पटना सिटी की रहने वाली गीतांजलि मैम पेंटिंग में वर्कशॉप देती है. उनसे ही मधुबनी, टिकुली और मंजुषा पेंटिंग की बारीकियों को सीखा. उनसे ही पहला ऑर्डर मिला था. कपड़े पर मधुबनी पेंटिंग का ज्यादा मांग होती है. वहीं अन्य उत्पाद में टिकुली और मंजुषा की मांग होती है. गिफ्ट आइटम से लेकर ऑर्डर पर चीजों को तैयार करती हूं. महीने के तीन से चार हजार रुपये मिल जाते हैं.

स्टिचिंग में डिप्लोमा करने के बाद महीने में कर रही 15-20 हजार की कमाई
पटना वीमेंस कॉलेज से स्टिचिंग में डिप्लोमा कर चुकी अनु कुमारी बताती हैं कि कॉलेज के दौरान उन्होंने कई कपड़ों को डिजाइन के साथ स्टिच करना सीखा. इनमें इंडो वेस्टर्न, इंडिया वीयर, कुशन कवर, गाउन सहित लोगों की पसंद अनुसार स्टिचिंग का कार्य करती हैं. पहला ऑर्डर कॉलेज की टीचर और छात्राओं से मिला था. फिर धीरे-धीरे इसकी जानकारी सभी को होने लगी. बुटीक के लोगों ने भी संपर्क किया. अब ऑर्डर पर ज्यादातर कपड़े तैयार करती हूं. महीने का 15-20 हजार रुपये मिल जाते हैं.

खुद को स्वावलंबी बनाने के लिए शुरू किया होम ट्यूशन
पटना वीमेंस कॉलेज में हिस्ट्री विभाग की थर्ड ईयर की छात्रा अंतिमा कुमारी बताती हैं कि घर में उनके पापा ही कमाते हैं. ऐसे में उन्हें हमेशा से उनकी मदद करने की इच्छा थी. कॉलेज में छात्राएं ईच वन टीच वन प्रोग्राम का हिस्सा होती है. तो वह कॉलेज में स्लम के बच्चों को पढ़ाती हैं साथ ही अपने घर के पास कॉलेज के बाद होम ट्यूशन देती है. कक्षा 1-5 के बच्चों को सारे विषय पढ़ाती हैं. अभी वह एक होम ट्यूशन दे रही हैं. महीने का 2500 रुपये उन्हें मिलता है.

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Published by: Rajeshkumar ojha

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