Patna News: (अजीत की रिपोर्ट) शिक्षा के बिना कोई भी कौम तरक्की नहीं कर सकती. किसी भी समाज की उन्नति और विकास में शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है. आज मुस्लिम समाज के बच्चे शिक्षा से दूर होते जा रहे हैं, इसलिए जरूरी है कि हम सभी इस्लाम की शिक्षाओं को मजबूती से अपनाएं और पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत को अपने जीवन का आदर्श बनाएं. उक्त बातें अमीर-ए-शरीअत, चिंतक-ए-मिल्लत हजरत मौलाना सैयद अहमद वली फैसल रहमानी ने कहीं. वह किशनपुर ईदगाह के विशाल मैदान में आयोजित शैक्षणिक जागरूकता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.
‘अल्लाह के बताए रास्ते और रसूल की सीरत से जुड़ें युवा’
खानकाह रहमानी के सज्जादानशीन तथा बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के अमीर-ए-शरीअत हजरत मौलाना सैयद अहमद वली फैसल रहमानी ने इस सम्मेलन की अध्यक्षता की. उन्होंने युवाओं को विशेष रूप से प्रेरित करते हुए कहा कि मुसलमान होने का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब हम अल्लाह के बताए हुए रास्ते पर चलकर अपनी जिंदगी गुजारेंगे. उन्होंने कहा कि हमें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत से जुड़ना चाहिए और उसे अपनी जिंदगी का मार्गदर्शक बनाना चाहिए. अल्लाह के आदेशों का पालन करने से दुनिया और आखिरत दोनों में सफलता प्राप्त होगी. उन्होंने युवाओं से तमाम सामाजिक बुराइयों से दूर रहने का आह्वान किया.
संतानों को दें नैतिक शिक्षा: नाजिम
सम्मेलन को संबोधित करते हुए इमारत-ए-शरिया बिहार, ओडिशा, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल के नाजिम हजरत मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सईदुर्रहमान कासमी ने कहा कि हमें ईमान की कीमत और उसकी अहमियत को समझना चाहिए. आज के दौर में धन-दौलत का लालच देकर लोगों के ईमान को खरीदने की कोशिश की जा रही है, जो अत्यंत दुखद है. उन्होंने लोगों से अपने ईमान की हिफाजत करने तथा अपनी संतानों को धार्मिक और नैतिक शिक्षा देने की अपील की. मौलाना ने आगे कहा कि देश नफरत से नहीं बल्कि प्रेम और भाईचारे से आगे बढ़ेगा. भारत गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है, जहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग आपसी सद्भाव के साथ रहते हैं. उन्होंने सफल आयोजन के लिए मौलाना रिजवान अहमद अशाअती की सराहना की.
नशा छोड़ें युवा, समाज से तैयार करें आईएएस और वकील
केंद्रीय दारुल कजा इमारत-ए-शरिया के काजी-ए-शरीअत मुफ्ती मोहम्मद अंजार आलम कासमी ने युवाओं से नशे की लत को छोड़कर शिक्षा की ओर लौटने की पुरजोर अपील की. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को अब यह संकल्प लेना चाहिए कि आने वाले समय में वह अपने समाज से आईएएस, वकील और बड़े प्रशासनिक अधिकारी तैयार करेगा. सम्मेलन को मुफ्ती वसी अहमद कासमी (उप काजी-ए-शरीअत केंद्रीय दारुल कजा) तथा जामिया अल-कासिम के नायब मोहतमिम मौलाना अंसार कासमी सहित अन्य विद्वानों ने भी संबोधित किया. इससे पूर्व, जोटकिया में जुहर से अस्र की नमाज के बीच आयोजित एक विशेष बैठक में भी उलेमाओं ने लोगों को मार्गदर्शन दिया.
अमीर-ए-शरीअत की एक झलक पाने को लगी रही कतार
इस सम्मेलन में अमीर-ए-शरीअत से मिलने और उन्हें देखने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं. सुपौल, मधेपुरा और सहरसा सहित विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल हुए. कार्यक्रम के अंत में तंजीम इमारत-ए-शरिया किशनपुर प्रखंड के सचिव मौलाना रिजवान अहमद अशाअती ने अमीर-ए-शरीअत का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया और आभार जताया. कार्यक्रम का संचालन मौलाना जियाउल्लाह जिया रहमानी ने किया, जबकि नात-ए-पाक मौलाना मंजर कासमी रहमानी ने प्रस्तुत की.
इस अवसर पर हाजी मोहम्मद एहसानुल हक, मौलाना अबुल कलाम कासमी शम्सी, हाफिज एहतेशाम रहमानी, मौलाना मोहम्मद अबुल कासिम रहमानी, मौलाना मोहम्मद मिन्हाज आलम नदवी, मौलाना रजी अहमद नदवी सहित सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित थे. कार्यक्रम को सफल बनाने में मोहम्मद जियाउद्दीन, अब्दुस्समद, अली अकबर और मौलाना हाशिम ने मुख्य भूमिका निभाई. सम्मेलन के समापन पर अमीर-ए-शरीअत ने देश में अमन-चैन, भाईचारा और बिहार की तरक्की के लिए विशेष दुआ मांगी.
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