Patna News: (आनंद तिवारी) बिहार में दवा कारोबारियों की हड़ताल का व्यापक असर बुधवार को राजधानी पटना में देखने को मिला. केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले दवा विक्रेताओं ने ई-फार्मेसी के विरोध में अपनी दुकानों को बंद रखा. इसके कारण मरीजों को दवाओं के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.
राजधानी पटना के अशोक राजपथ, जीएम रोड, बेली रोड और आईजीआईएमएस के आसपास स्थित दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं. पटना में लगभग 7,000 और पूरे बिहार में 40,000 से अधिक मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ.
गली-मोहल्लों में खुली रहीं कुछ दुकानें
हालांकि, गली-मोहल्लों में स्थित कुछ छोटी दवा दुकानें खुली रहीं, जहां मरीजों और परिजनों की भीड़ देखी गई. वहीं, सरकारी अस्पतालों में संचालित जनऔषधि केंद्रों पर भी दवाओं के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं.
कारोबार को करोड़ों का नुकसान
दवा दुकानों के बंद रहने से केवल पटना में लगभग 12 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ, जबकि पूरे बिहार में करीब 34 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित होने का अनुमान है. इससे राज्य सरकार को लगभग 1.5 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की बात भी सामने आई है.
हालांकि राहत की बात यह रही कि सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की आपूर्ति सामान्य बनी रही. सरकार द्वारा 611 प्रकार की जरूरी दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे आपातकालीन सेवाओं पर ज्यादा असर नहीं पड़ा.
ई-फार्मेसी और नई नीति के खिलाफ विरोध
बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष परसन कुमार सिंह ने बताया कि यह हड़ताल केंद्र सरकार की नई दवा नीति और ऑनलाइन दवा बिक्री (ई-फार्मेसी) के विरोध में की गई है. उन्होंने कहा कि 20 मई की रात 12 बजे तक राष्ट्रीय स्तर पर दुकानें बंद रखने का निर्णय लिया गया है.
एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी के बढ़ते प्रभाव से पारंपरिक मेडिकल स्टोरों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है. इस आंदोलन को बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन और पटना केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन दोनों का समर्थन प्राप्त है.
हड़ताल में हजारों दुकानदार शामिल
संगठनों के अनुसार बिहार में 40 हजार से अधिक दवा दुकानें इस हड़ताल में शामिल हैं. सभी दवा विक्रेताओं, फार्मासिस्टों और थोक व्यापारियों से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है.
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