पटना का पारा पहुंचा 40 के पार, तल्ख धूप और उमस ने किया बेहाल, डायरिया-स्किन रोग के मरीज बढ़े

Patna News: पिछले एक हफ्ते से झुलसाती धूप और बेहिसाब उमस ने पटना के लोगों को परेशान कर रखा है. बुधवार को अधिकतम तापमान 40.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. तीखी धूप व बढ़ते तापमान का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है. शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में उल्टी-दस्त और बुखार जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. हालात यह हैं कि सुबह आठ बजे से ही अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं. डॉक्टरों की सलाह है कि इस भीषण गर्मी में लोग अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें और पूरी सावधानी बरतें.

Patna News: पटना में बीते चार दिनों से जारी प्रचंड गर्मी और चिलचिलाती धूप ने लोगों की सेहत पर बुरा असर डाला है. उल्टी, दस्त, डायरिया और स्किन संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या अस्पतालों में तेजी से बढ़ रही है. प्रमुख सरकारी अस्पताल पीएमसीएच, एनएमसीएच, एम्स और आइजीआइएमएस की इमरजेंसी वार्ड में रोजाना से करीब 50 से अधिक मरीज उल्टी-दस्त की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. इनमें सुबह से रात तक करीब 10 से 15 मरीजों को भर्ती किया जा रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी और लापरवाही भरे खानपान की वजह से स्थिति बिगड़ रही है. खासतौर पर बच्चे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. डॉक्टर अस्पताल आने वाले मरीजों को सुबह 11 बजे से दोपहर चार बजे तक धूप में नहीं निकलने के लिए जागरूक कर रहे हैं.

रोजाना पहुंच रहे 50 से अधिक मरीज, इमरजेंसी वार्ड फुल

पीएमसीएच, एनएमसीएच, एम्स और आइजीआइएमएस जैसे प्रमुख अस्पतालों की इमरजेंसी में रोजाना 50 से अधिक मरीज उल्टी-दस्त की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. इनमें से 10 से 15 मरीजों को हालत गंभीर होने पर भर्ती किया जा रहा है. वहीं बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव से बच्चे के शरीर में पानी की कमी आ जाती है. अगर बच्चे को बार-बार उल्टी और दस्त हो रहे हैं तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें. पानी की कमी को दूर करने के लिए ओआरएस, जिंक पिलाते रहें. डायरिया से पीड़ित मरीज को करीब तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना चाहिए.

बच्चों में डायरिया के मामले बढ़े, 12 भर्ती

बीते 24 घंटे में पीएमसीएच और आइजीआइएमएस में डायरिया के लक्षणों के साथ 12 बच्चे भर्ती किये गये हैं. अस्पतालों में प्रतिदिन 15–20 डायरिया मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें से 4–5 को गंभीर हालत में भर्ती करना पड़ रहा है. पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ आइएस ठाकुर ने बताया कि धूप में अत्यधिक समय बिताना और असंतुलित खानपान इस स्थिति के प्रमुख कारण हैं.

कोल्ड रूम की कमी से बढ़ी परेशानी

गर्मी के असर से निपटने के लिए राज्य सरकार ने सभी अस्पतालों में कोल्ड रूम तैयार करने के निर्देश दिये थे. हालांकि, केवल पीएमसीएच और एनएमसीएच में यह सुविधा उपलब्ध है. न्यू गार्डिनर रोड, एलएनजेपी हड्डी अस्पताल, गुरु गोविंद सिंह अस्पताल और कई अनुमंडलीय अस्पतालों में अब तक कोल्ड रूम नहीं बनाये गये हैं. इससे गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है. इतना ही नहीं पांच या 10 बेड के बनने वाले इस कोल्ड रूम में कोल्ड पैक, ओआरएस के पैकेट, शीतल पेयजल के इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है.

इन लक्षणों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं मरीज

  • पेट में मरोड़ और लगातार उल्टी-दस्त
  • मितली और शरीर में पानी की कमी
  • बुखार और बदहजमी
  • मल में खून, भूख में कमी
  • सिर दर्द, मुंह सूखना और कमजोरी

गर्मी से बढ़ा सनबर्न, फफोले, घमौरियां व एलर्जी

भीषण गर्मी और तीखी धूप का असर अब केवल डायरिया और बुखार तक सीमित नहीं रहा. बीते चार दिनों में त्वचा संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है. खासकर सनबर्न, फफोले, घमौरियां और एलर्जिक चर्म रोगों से पीड़ित लोग बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं. डॉक्टरों के अनुसार, गर्मी के कारण त्वचा पर जो रिएक्शन हो रहा है उसे चिकित्सकीय भाषा में पॉलीमोरफिक लाइट इरेक्शन कहा जाता है. यह समस्या खासतौर पर महिलाओं में अधिक देखी जा रही है, क्योंकि उनकी त्वचा पुरुषों की तुलना में अधिक संवेदनशील और कोमल होती है.

छाता को बनाएं जीवनशैली का हिस्सा: बिमल राय, वरिष्ठ फिजिशियन

हाल के दिनों में कई महिलाएं सनबर्न से बचाव को लेकर परामर्श लेने आ रही हैं. गर्मी में त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है कि महिलाएं धूप से पूरी तरह खुद को ढकें. सबसे प्रभावी उपाय है छाता. महिलाएं छाते को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. अगर छाते का उपयोग संभव न हो, तो कम से कम दुपट्टे से चेहरा और गर्दन को ढकना अनिवार्य है. वहीं पुरुषों के लिए भी सलाह है कि वे गर्मी में टोपी, कैप या स्कार्फ का उपयोग करें और यूवी प्रोटेक्टेड धूप का चश्मा लगाएं.

धूप में निकलें, तो यह उपाय करें

  • छाता, टोपी और धूप का चश्मा का नियमित उपयोग करें
  • सूती व हल्के कपड़े पहनें, जो शरीर को ढकें
  • धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाएं (एसपीएफ 30 या अधिक)
  • अधिक से अधिक पानी और तरल पदार्थ का सेवन करें
  • दोपहर 11 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें

गर्मी में बच्चे, युवा व बुजुर्ग ये बरतें सावधानियां

  • बच्चों को सीधी धूप में खेलने न दें.
  • उन्हें समय-समय पर पानी या नींबू-पानी दें.
  • टाइट कपड़े और प्लास्टिक डायपर से बचें, ताकि गर्मी दाने न हों.
  • स्कूल जाते समय टोपी और पानी की बोतल देना न भूलें.

युवाओं के लिए जरुरी बातें

  • अगर काम के कारण बाहर जाना जरूरी हो, तो शरीर को ढंककर निकलें.
  • स्पोर्ट्स या वर्कआउट सुबह-सुबह या शाम को करें.
  • एनर्जी ड्रिंक की जगह नारियल पानी, छाछ या नींबू पानी पिएं.

बुजुर्गों के लिए जरुरी बातें

  • शरीर में पानी की कमी जल्दी हो सकती है, इसलिए पानी व तरल पदार्थ नियमित रूप से लें.
  • ब्लड प्रेशर या डायबिटीज के मरीजों को गर्मी में विशेष ध्यान देना चाहिए.
  • बहुत गर्म कमरे में न रहें – पंखा जरूर चलाएं या खिड़की खोलकर हवा आने दें.
  • हल्का, सुपाच्य भोजन करें और तैलीय खाना टालें.

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लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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