Bihar News: भोजपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शातिर जालसाज ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का डायरेक्टर बताकर जिला अधिकारी (DM) तनय सुल्तानिया को कॉल कर दिया. आरोपी ने न सिर्फ अपनी फर्जी पहचान बताई, बल्कि सरकारी काम के नाम पर दबाव भी बनाने की कोशिश की.
पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. उसकी पहचान पटना के बुद्धा कॉलोनी निवासी अभिषेक भोपल्का उर्फ अभिषेक अग्रवाल के रूप में हुई है. गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से करीब 2.61 लाख रुपये नकद और मोबाइल फोन बरामद किया गया. पूछताछ में उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया.
व्हाट्सएप कॉल से शुरू हुआ पूरा खेल
घटना 27 अप्रैल 2026 की है, जब DM के सरकारी मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली से ED का डायरेक्टर बताया और विभागीय कार्यों को लेकर दबाव बनाने लगा. संदेह होने पर DM कार्यालय के कर्मचारी रोहित कुमार ने 28 अप्रैल को नवादा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई.
STF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
मामला दर्ज होते ही STF और स्थानीय पुलिस एक्टिव हो गई. तकनीकी जांच के जरिए आरोपी की लोकेशन ट्रेस की गई, जो लगातार ठिकाना बदल रहा था. आखिरकार पटना के कोतवाली क्षेत्र में उसकी लोकेशन मिलने पर पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया.
पहले भी कर चुका है हाई-प्रोफाइल ठगी
जांच में सामने आया कि अभिषेक पहले भी कई बड़े अधिकारियों को फर्जी पहचान के जरिए गुमराह कर चुका है. 2022 में उसने खुद को पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बताकर तत्कालीन DGP एसके सिंघल को फोन किया था और एक IPS अधिकारी के पक्ष में दबाव बनाने की कोशिश की थी.
बड़े अफसरों को बनाता था निशाना
अभिषेक बेहद शातिर तरीके से फर्जी सिम कार्ड और मोबाइल का इस्तेमाल करता था. वह खुद को कभी ED अधिकारी, कभी जज तो कभी मंत्री का PA बताकर IAS और IPS अधिकारियों को फोन करता और उन्हें ब्लैकमेल करता था. उस पर पटना और भोजपुर में रंगदारी और धोखाधड़ी के कई मामले पहले से दर्ज हैं.
फोटो और सोशल मीडिया से बनाता था प्रभाव
आरोपी बड़े अधिकारियों और नेताओं के साथ खिंचवाई गई तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था, जिससे लोगों के बीच उसकी पहुंच और रौब बना रहे. इस बार उसने व्हाट्सऐप DP में एक वरिष्ठ जज के साथ अपनी तस्वीर लगाई थी, ताकि उसकी पहचान पर कोई शक न करे.
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ केस
भोजपुर के नवादा थाने में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की 5 धाराओं और आईटी एक्ट की 2 धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. इनमें जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं, जिनमें 7 साल तक की सजा का प्रावधान है.
DGP कॉल केस में भी रहा शामिल
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि अभिषेक ने पहले एक IPS अधिकारी को बचाने के लिए चीफ जस्टिस बनकर DGP को कॉल किया था. उसके पास से कई सिम कार्ड और दर्जनों मोबाइल फोन बरामद किए गए थे, जिनकी फोरेंसिक जांच में उसके अपराध की पुष्टि हुई थी.
बार-बार बदलता था पहचान, कई बार जा चुका है जेल
अभिषेक का आपराधिक इतिहास लंबा है. वह 2014 से ही इस तरह के मामलों में शामिल रहा है और कई बार जेल भी जा चुका है. 2018 में उसे गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजा गया था. इसके अलावा भागलपुर समेत कई जिलों में उस पर केस दर्ज हैं.
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क और उसके संभावित सहयोगियों की जांच में जुटी है. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.
