पटना में जूनियर इंजीनियरों की कमी से जिला परिषद योजनाओं की रफ्तार धीमी, 400 से अधिक प्रोजेक्ट अटके; सदस्यों ने जताई नाराजगी

Patna News: पटना जिले में जूनियर इंजीनियरों की कमी के कारण जिला परिषद की विकास योजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ गई है और 400 से अधिक प्रोजेक्ट अटके हुए हैं. 45 जिला परिषद सदस्यों द्वारा अनुशंसित योजनाओं का एस्टीमेट और क्रियान्वयन केवल 5 जूनियर इंजीनियरों पर होने से काम पर भारी दबाव है.

Patna News: (प्रमोद झा की रिपोर्ट)
पटना जिले में जिला परिषद की विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर असर देखने को मिल रहा है. कारण है जूनियर इंजीनियरों की भारी कमी, जिससे सैकड़ों योजनाओं का एस्टीमेट और कार्यान्वयन लंबित पड़ा है. इस स्थिति को लेकर जिला परिषद सदस्यों में नाराजगी बढ़ रही है.

45 सदस्यों की 400 से अधिक योजनाएं अटकी

जानकारी के अनुसार जिले में जिला परिषद के 45 सदस्य हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों से 400 से अधिक विकास योजनाओं की अनुशंसा की है. लेकिन इन योजनाओं को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है.

सिर्फ 5 जूनियर इंजीनियरों पर पूरी जिम्मेदारी

इन सभी योजनाओं को पूरा कराने की जिम्मेदारी मात्र पांच जूनियर इंजीनियरों के पास है. इन्हें एस्टीमेट तैयार करने, क्षेत्रीय सत्यापन और तकनीकी रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण कार्य करने होते हैं, जिससे कार्यभार काफी बढ़ गया है.

एक इंजीनियर पर 9 से 12 सदस्यों का बोझ

सूत्रों के अनुसार एक जूनियर इंजीनियर के पास औसतन 9 से 12 जिला परिषद सदस्यों के क्षेत्र का काम है. इतनी अधिक जिम्मेदारी के कारण काम की गति प्रभावित हो रही है.

योजनाओं की प्रक्रिया में हो रही देरी

जिला परिषद सदस्यों का कहना है कि योजनाएं तो भेज दी गई हैं, लेकिन उनकी स्वीकृति और एस्टीमेट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है. इससे विकास कार्यों में लगातार देरी हो रही है.

इंजीनियरों की अनुपस्थिति और असहयोग का आरोप

सदस्यों ने आरोप लगाया है कि कुछ जूनियर इंजीनियर अक्सर अवकाश पर रहते हैं, जिससे काम प्रभावित होता है. वहीं कई मामलों में क्षेत्र भ्रमण के लिए वाहन उपलब्ध कराने की शर्त रखी जाती है.

जिला परिषद अध्यक्ष ने लिखा डीएम को पत्र

स्थिति को गंभीर मानते हुए जिला परिषद अध्यक्ष कुमारी स्तुति गुप्ता ने डीएम को पत्र लिखकर दूसरे विभागों से भी जूनियर इंजीनियरों की तैनाती की मांग की है, इससे कार्य में तेजी आने की उम्मीद जताई गई है,

पंचायत चुनाव से पहले बढ़ी चिंता

आगामी चार से पांच महीने में पंचायत चुनाव होने की संभावना के बीच जिला परिषद सदस्य अपनी योजनाओं के समय पर पूरा न होने को लेकर चिंतित हैं. उनका कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो विकास कार्य और पीछे रह जाएंगे.

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Published by: Karuna Tiwari

करुणा तिवारी पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की. 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है. अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं.

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