बकरीद को लेकर ट्रेनों में भारी भीड़: जनरल डिब्बों में पैर रखने तक की जगह नहीं, यात्रियों की परेशानी बढ़ी

Patna News: बकरीद पर पटना जंक्शन व ट्रेनों में भारी भीड़ उमड़ी, जनरल डिब्बों में पैर रखने की जगह नहीं रही, यात्रियों को भारी परेशानी और अव्यवस्था का सामना करना पड़ा.

Patna News: (आनंद तिवारी की रिपोर्ट) बकरीद पर्व के अवसर पर गुरुवार को पटना जंक्शन पर यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिली. लोकल यात्रियों की अचानक बढ़ी संख्या के कारण ट्रेनों में जबरदस्त दबाव बन गया.
पटना से गया, जहानाबाद, नालंदा, बिहटा, आरा, बक्सर, राजगीर और मुजफ्फरपुर रूट की मेमू, पैसेंजर और इंटरसिटी ट्रेनों के जनरल डिब्बों में भीड़ इतनी अधिक रही कि यात्रियों को खड़े होने तक की जगह नहीं मिल पाई.

दरवाजों और शौचालय तक लटके दिखे यात्री

स्थिति यह रही कि कई यात्री दरवाजों और शौचालय के पास खड़े होकर यात्रा करने को मजबूर दिखे, जबकि कुछ खिड़कियों के पास भी भीड़ में फंसे नजर आए. ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची. भीड़ का दबाव केवल ट्रेनों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि प्लेटफॉर्म से लेकर फुट ओवरब्रिज तक यात्रियों की भारी भीड़ देखी गई, जिससे अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी रही.

रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

भीड़ के बीच रेलवे सुरक्षा व्यवस्था भी कमजोर नजर आई, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. यात्रियों का कहना है कि छुट्टी देर से मिलने और आरक्षण टिकट उपलब्ध न होने के कारण उन्हें मजबूरी में जनरल डिब्बों में सफर करना पड़ा.

त्योहार पर घर लौटने की होड़

बकरीद के मौके पर लोग अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने घर लौट रहे हैं, जिसके कारण ट्रेनों में अचानक भारी दबाव बन गया और यात्रा व्यवस्था प्रभावित हुई.

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By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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