विश्व रक्तदाता दिवस: हर तीन माह पर रक्तदान कर निभा रहे सामाजिक जिम्मेदारी, युवाओं के लिए मिसाल बने अंशु

Patna News: बिहटा में रहने वाले अंशु कुमार मिश्रा 18 वर्ष की उम्र से नियमित रूप से हर तीन माह पर रक्तदान कर रहे हैं. वे जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की व्यवस्था भी करते हैं. समाजसेवा के इस कार्य से उन्होंने कई युवाओं को प्रेरित किया है और विश्व रक्तदाता दिवस पर रक्तदान का संदेश दिया है.

Patna News: (मोनु कुमार मिश्रा की रिपोर्ट) रक्तदान को महादान कहा जाता है, लेकिन इसे नियमित सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में निभाने वाले लोग कम ही मिलते हैं. पटना जिले के मसौढ़ी प्रखंड के करवा गांव में जन्मे अंशु कुमार मिश्रा ऐसे ही युवाओं में शामिल हैं, जिन्होंने रक्तदान को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना लिया है.

18 वर्ष की उम्र से कर रहे नियमित रक्तदान

बचपन से दुल्हिन बाजार प्रखंड के अलीपुर गांव स्थित अपने नाना श्री राम मिश्रा के घर रहकर पढ़ाई करने वाले अंशु कुमार मिश्रा वर्तमान में बिहटा में रहकर निजी नौकरी कर रहे हैं. 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद से वे नियमित रूप से हर तीन माह पर रक्तदान करते आ रहे हैं. अंशु का मानना है कि रक्तदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दिया जाने वाला सबसे बड़ा उपहार है. यही सोच उन्हें लगातार इस मानवीय कार्य से जोड़े हुए है.

जरूरत पड़ने पर हर समय रहते हैं तैयार

अंशु केवल स्वयं रक्तदान ही नहीं करते, बल्कि जरूरत पड़ने पर अन्य रक्तदाताओं की व्यवस्था कराने में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं. किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होने पर वे दिन-रात मदद के लिए तैयार रहते हैं.

सेवा की भावना ने दिखाई राह

अंशु बताते हैं कि बचपन में उन्होंने कई लोगों को रक्त की कमी के कारण इलाज में परेशान होते देखा था. इन परिस्थितियों ने उनके मन में समाजसेवा की भावना पैदा की. इसी प्रेरणा से उन्होंने रक्तदान को अपनी नियमित आदत और सामाजिक दायित्व बना लिया.

युवाओं को भी कर रहे जागरूक

रक्तदान के साथ-साथ अंशु युवाओं को भी इसके प्रति जागरूक कर रहे हैं. उनके प्रयासों से कई युवा पहली बार रक्तदान के लिए आगे आए हैं. वे लोगों को बताते हैं कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और इससे किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती.

विश्व रक्तदाता दिवस पर दिया संदेश

विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर अंशु कुमार मिश्रा ने युवाओं से नियमित रक्तदान करने और इससे जुड़े भ्रमों को दूर करने की अपील की. उन्होंने कहा कि एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद व्यक्ति के लिए जीवनदान साबित हो सकता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

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