एम्स पटना में सीपीआर प्रशिक्षण: जीवन रक्षा की दिशा में एक और मजबूत कदम, देश भर से जुटे स्वास्थ्यकर्मी

Patna News: पटना एम्स के बाल रोग विभाग द्वारा भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी के सहयोग से 17वें 'सीपीआर प्रोवाइडर कोर्स' का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में देश भर से आए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में 'गोल्डन मिनट्स' के दौरान जीवन रक्षक सीपीआर (CPR) तकनीक देने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया.

Patna News: (अजीत कुमार की रिपोर्ट) एम्स पटना ने आपातकालीन चिकित्सा प्रशिक्षण के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता को और आगे बढ़ाते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है. एम्स के बाल रोग विभाग द्वारा ‘भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी’ के विशेष सहयोग से 17वें इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन प्रोवाइडर कोर्स का सफल आयोजन किया गया. इस उच्चस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को गंभीर आपातकालीन स्थितियों में मरीजों की जान बचाने के लिए ‘लाइफ सेविंग स्किल्स’ में पूरी तरह दक्ष, निपुण और आत्मविश्वासी बनाना था.

इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिष्ठित चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संस्थानों से आए अनुभवी चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, नर्सिंग छात्रों तथा पैरामेडिकल कर्मियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. दो दिवसीय इस कार्यशाला की समाप्ति पर प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी, व्यावहारिक और कौशल आधारित प्रशिक्षण बताया. उन्होंने कहा कि यह कोर्स वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों में बिना पैनिक हुए त्वरित और सटीक निर्णय लेने में उनके लिए मील का पत्थर साबित होगा.

कार्डियक अरेस्ट में हर सेकंड कीमती, समय पर मिला सीपीआर बचा सकता है जान: प्रो. राजू अग्रवाल

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (ब्रिग.) डॉ. राजू अग्रवाल ने किया. उन्होंने दीप प्रज्जवलित कर सत्र की शुरुआत की और उपस्थित डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि कार्डियक अरेस्ट जैसी अचानक उत्पन्न होने वाली गंभीर चिकित्सकीय स्थितियों में प्रत्येक सेकंड बेहद कीमती होता है. ऐसे संवेदनशील समय पर यदि मरीज को तुरंत और प्रभावी ढंग से सीपीआर दे दिया जाए, तो किसी भी व्यक्ति को मौत के मुंह से बाहर निकाला जा सकता है और उसका जीवन बचाया जा सकता है. उन्होंने एम्स पटना और भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी के इस संयुक्त मानवीय और तकनीकी प्रयास की दिल से सराहना की.

इस प्रतिष्ठित कोर्स का सफल संचालन मुख्य रूप से डॉ. प्रदीप कुमार के कुशल निर्देशन में किया गया. कार्यशाला को सफल बनाने और प्रतिभागियों के तकनीकी सत्रों को सुचारु रूप से चलाने में डॉ. चंद्र मोहन कुमार, डॉ. अरुण प्रसाद तथा डॉ. पुनीत कुमार चौधरी ने भी अपनी महत्वपूर्ण और मार्गदर्शक भूमिका निभाई.

‘गोल्डन मिनट्स’ की अवधारणा पर रहा विशेष फोकस, सिखाई गई चेस्ट कंप्रेशन की बारीकियां

प्रशिक्षण सत्रों के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों को चिकित्सा विज्ञान के नवीनतम प्रोटोकॉल के तहत बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एवं आधुनिक सीपीआर गाइडलाइंस के अनुरूप डमी पर व्यावहारिक अभ्यास कराया गया.

प्रशिक्षण के दौरान सिखाए गए मुख्य बिंदु:

  • कार्डियक अरेस्ट की त्वरित पहचान: मरीज के बेहोश होने या पल्स रुकने की तुरंत पहचान करना.
  • हाई-क्वालिटी चेस्ट कंप्रेशन: छाती को सही दबाव और सही गति के साथ दबाने का सही तरीका.
  • एयरवे मैनेजमेंट: मरीज के फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए सांस नली को सुचारु रखना.
  • इमरजेंसी रिस्पॉन्स: आपातकालीन परिस्थितियों में तुरंत मेडिकल टीम को एक्टिवेट करना.

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने ‘गोल्डन मिनट्स’ की अवधारणा पर विशेष जोर दिया. डॉक्टरों ने बताया कि दिल की धड़कन रुकने के बाद के शुरुआती 2 से 3 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, जिसमें सही प्रतिक्रिया ही जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करती है.

इस विशेष अवसर पर डॉ. अरुण प्रसाद, डॉ. सुमन मिश्रा, डॉ. नीता केव्लानी, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. अमित कुमार एवं डॉ. श्वेता ने मास्टर ट्रेनर के रूप में सभी प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग और व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान किया. कार्यक्रम के समापन पर वरिष्ठ डॉक्टरों ने संयुक्त रूप से कहा कि निरंतर प्रशिक्षण और कौशल विकास ही एक सशक्त, मजबूत और संवेदनशील स्वास्थ्य प्रणाली की असली आधारशिला है.

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Published by: Nikhil Anurag

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