Patna Gas Agency Protest (अजीत कुमार): बिहार की राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ इलाके से आम जनता की परेशानी और प्रशासनिक दावों की पोल खोलती एक बड़ी खबर सामने आ रही है. फुलवारी शरीफ के नोहसा स्थित सुलभ गैस एजेंसी की मनमानी और लचर व्यवस्था के खिलाफ स्थानीय उपभोक्ताओं का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया है. गुरुवार को लगातार दूसरे दिन भारी संख्या में पीड़ित महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने गैस एजेंसी कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया. उग्र उपभोक्ताओं ने एजेंसी प्रबंधन पर सीधा मनमानी का आरोप लगाते हुए पटना जिलाधिकारी (DM) से तुरंत दखल देने की गुहार लगाई है.
गैस मिली नहीं और मोबाइल पर आ गया ‘सक्सेसफुल डिलीवरी’ का फर्जी मैसेज!
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने गैस एजेंसी के एक बड़े खेल का खुलासा करते हुए बताया कि डिजिटल व्यवस्था के नाम पर उपभोक्ताओं के साथ मजाक हो रहा है. गैस बुकिंग कराने के बाद ग्राहकों को बाकायदा डीएनए (DNA) नंबर जारी कर दिया जाता है. इसके बाद उपभोक्ताओं के मोबाइल पर बकायदा सिलेंडर डिलीवर होने का मैसेज भी आ जाता है, जबकि हकीकत में उनके घर तक गैस सिलेंडर पहुंचता ही नहीं है. इस फर्जी मैसेजिंग के कारण लोगों को भीषण गर्मी में गैस गोदाम और दफ्तर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.
होम डिलीवरी पूरी तरह ठप, रोते हुए बुजुर्गों ने बयां किया दर्द
| उपभोक्ताओं का मुख्य आरोप | जमीनी हकीकत और जनता का दर्द |
| ठप होम डिलीवरी | घर-घर सिलेंडर पहुंचाने की व्यवस्था पूरी तरह बंद है, लोग खुद ढोने को मजबूर हैं. |
| कामकाज का नुकसान | लोगों ने कहा- “हम अपनी नौकरी पर जाएं, कमाएं-खाएं या यहाँ घंटों लाइन में खड़े रहें?” |
| पुलिसिया खौफ | महिलाओं ने रुआंसे होकर कहा- “आवाज उठाओ तो पुलिस लाठी और केस की धमकी देती है.” |
प्रदर्शन में शामिल उपेंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि उपभोक्ताओं को नियमित और पारदर्शी तरीके से गैस उपलब्ध कराने के बजाय एजेंसी अपनी मनमानी पर अड़ी है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर होम डिलीवरी व्यवस्था सुचारू नहीं की गई, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा.
प्रोप्राइटर का दावा “सब ठीक है”, पर जनता बोली “दिखावा है”
इस पूरे बवाल और हंगामे पर अपना पक्ष रखते हुए सुलभ गैस एजेंसी की प्रोप्राइटर ने जनता के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने दावा किया कि जिला प्रशासन के कड़े निर्देशानुसार हर घर तक गैस की होम डिलीवरी सुरक्षित तरीके से पहुंचाई जा रही है और किसी भी उपभोक्ता को परेशान होने की जरूरत नहीं है.
हालांकि, प्रोप्राइटर के इस दावे के उलट जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. दफ्तर के बाहर लगी लंबी कतारें साफ बता रही हैं कि व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है. प्रदर्शनकारियों ने आक्रोश जताते हुए सीधे पटना के जिलाधिकारी से इस पूरी धांधली की उच्च स्तरीय जांच कराने और उपभोक्ताओं को इस कतार प्रणाली से मुक्ति दिलाने की मांग की है.
