पटना : 25 हजार रिश्वत लेते पकड़े गए तत्कालीन शिक्षा पदाधिकारी को 3 साल की सजा, 50 हजार जुर्माना भी लगाया

पटना निगरानी अदालत ने 16 साल पुराने रिश्वत मामले में तत्कालीन अनुमंडलीय शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार विमल को दोषी पाया है. उन्हें तीन साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है और 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है.

Patna News : करीब 16 साल पुराने निगरानी ट्रैप मामले में विशेष निगरानी न्यायालय, पटना ने तत्कालीन अनुमंडलीय शिक्षा पदाधिकारी दलसिंहसराय, समस्तीपुर विनोद कुमार विमल को रिश्वत लेने का दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनायी है. अदालत ने उन पर कुल 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

विद्यालय का रजिस्टर लौटाने के बदले मांगी थी रिश्वत

मामला वर्ष 2010 का है. अभियोजन के अनुसार, तत्कालीन अनुमंडलीय शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार विमल ने समस्तीपुर जिले के मोहनपुर प्रखंड और पटोरी थाना क्षेत्र स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सरारी के प्रभारी प्रधानाध्यापक बैद्यनाथ पंडित प्रभाकर से विद्यालय के जब्त रजिस्टर वापस करने के एवज में 25 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी.

बताया गया कि विद्यालय के रजिस्टर अधिकारी ने पहले जब्त किये थे, लेकिन प्रधानाध्यापक को इसकी प्राप्ति नहीं दी गयी थी. इसके बाद प्रधानाध्यापक ने निगरानी विभाग में शिकायत की.

बोलेरो में रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए थे

शिकायत के सत्यापन के बाद निगरानी विभाग ने ट्रैप की कार्रवाई की. 10 फरवरी 2010 को पटना के मीठापुर बस स्टैंड के पास अमन होटल के समीप एक बोलेरो वाहन में 25 हजार रुपये रिश्वत लेते विनोद कुमार विमल को निगरानी टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था.

दो धाराओं में तीन-तीन साल की सजा

विशेष वाद संख्या 10/2010 और निगरानी थाना कांड संख्या 13/2010 में विशेष न्यायाधीश, निगरानी, पटना अतुल कुमार सिंह ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी. वहीं धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत भी तीन वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गयी है. जुर्माना नहीं देने पर चार माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा.

11 गवाहों के बयान दर्ज हुए

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 गवाहों का परीक्षण कराया गया. निगरानी ट्रैप मामलों के विशेष लोक अभियोजक बिजय भानु उर्फ पुटटू बाबू ने अभियोजन की ओर से पैरवी की. करीब 16 वर्ष पुराने इस रिश्वतखोरी मामले में अदालत के फैसले के बाद तत्कालीन शिक्षा पदाधिकारी को सजा सुनायी गयी है.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By अजीत कुमार

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >