पटना: डेयरी विकास में विश्वास-पारदर्शिता जरूरी, सीधे बैंक खाते में भुगतान से बिहार मॉडल की सराहना: कॉम्फेड अध्यक्ष

बिहार के डेयरी विकास में विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए दुग्ध उत्पादकों के खातों में सीधे भुगतान की व्यवस्था की गई है. इस मॉडल की कार्यशाला में व्यापक सराहना हुई है. जानें कैसे बिहार डेयरी क्षेत्र में मजबूत हो रहा है.

Patna News : डेयरी सहकारी समितियों के सतत विकास के लिए विश्वास और पारदर्शिता को सबसे महत्वपूर्ण आयाम बताते हुए बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव सह कॉम्फेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि दुग्ध उत्पादकों के हितों को प्राथमिकता देते हुए बिहार में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं.

दूध खरीद का भुगतान सीधे बैंक खाते में

21 अगस्त को कोलकाता में आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कॉम्फेड और उससे संबद्ध दुग्ध संघों की ओर से दूध खरीद बढ़ाने के लिए दुग्ध उत्पादक सदस्यों को दूध की कीमत का सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जा रहा है. प्रत्यक्ष खाता हस्तांतरण की व्यवस्था से डेयरी सहकारी समितियों में विश्वास और पारदर्शिता को मजबूत किया जा रहा है.

पांच राज्यों के डेयरी अधिकारियों ने लिया हिस्सा

कार्यशाला का आयोजन भारत सरकार के राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के घटक-बी, सहकारिता के माध्यम से डेयरी विकास और जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी समर्थित परियोजना के तहत किया गया. इसमें बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सहकारी डेयरी महासंघों और दुग्ध संघों के वरीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया. आयोजन राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और पशुपालन एवं डेयरी विभाग, भारत सरकार की ओर से किया गया.

बिहार के डेयरी संघों के प्रदर्शन की सराहना

कार्यशाला में डीटीसी-जेआईसीए परियोजना के तहत बिहार में हुए कार्यों और उपलब्धियों की समीक्षा की गयी. समीक्षा के दौरान कॉम्फेड और उससे संबद्ध दुग्ध संघों की दूध खरीद, विपणन और प्रसंस्करण अवसंरचना को मजबूत करने के निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर उपलब्धियों की जानकारी दी गयी. परियोजना के क्रियान्वयन और लक्ष्यों को हासिल करने में बिहार के दुग्ध संघों के प्रदर्शन की सराहना की गयी.

दूध खरीद और कोल्ड चेन विस्तार पर चर्चा

बैठक में विभिन्न संस्थानों ने डेयरी मूल्य श्रृंखला से जुड़ी सफलता की कहानियां, चुनौतियां और अनुभव साझा किए. डेयरी सहकारी नेटवर्क को मजबूत करने, दूध खरीद बढ़ाने, कोल्ड चेन अवसंरचना के विस्तार और मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पादों के निर्माण की सुविधाओं को आधुनिक बनाने पर चर्चा हुई. बिहार में पशुओं की दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों और उनकी सफलता की भी सराहना की गयी.

परियोजना के दूसरे चरण पर हुआ मंथन

कार्यशाला में डीटीसी-जेआईसीए परियोजना के प्रस्तावित दूसरे चरण को कॉम्फेड और संबद्ध दुग्ध संघों में लागू करने को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया. पहले चरण के अनुभवों के आधार पर दूसरे चरण में डेयरी सहकारी समितियों का दायरा और सहयोग बढ़ाने की योजना पर चर्चा हुई. प्रस्तावित घटकों, फंडिंग पैटर्न, पात्रता मानदंड और विभिन्न राज्यों की जरूरतों के आकलन पर भी विचार किया गया.

श्वेत क्रांति 2.0 के तहत सहकारी समितियों पर चर्चा

बैठक में सहकारी डेयरी क्षेत्र के लिए प्रस्तावित मान्यता ढांचे पर भी चर्चा हुई. श्वेत क्रांति 2.0 के तहत नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन एवं पंजीकरण में राज्यों की उपलब्धियों और डेयरी विकास पोर्टल पर आंकड़ों को अपडेट करने की स्थिति की भी समीक्षा की गयी.

पांच राज्यों के अधिकारियों ने साझा किए अनुभव

कार्यशाला में पश्चिम बंगाल सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ के प्रबंध निदेशक दीपांजन भट्टाचार्य, भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उप आयुक्त दयानंद सावंत, झारखंड मिल्क फेडरेशन के प्रबंध निदेशक राजेश गुप्ता, पूर्वी राज्यों के विभिन्न दुग्ध संघों एवं फेडरेशनों के प्रबंध निदेशक तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अधिकारी शामिल हुए.


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By अजीत कुमार

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