पटना से नितिश सिंह की रिपोर्ट
Patna Cyber Fraud Online Trading Scam News: राजधानी पटना से ऑनलाइन निवेश और शेयर बाजार के नाम पर चूना लगाने वाली खबर सामने आई है. पटना के रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाके के रहने वाले अभिमन्यू कुमार को साइबर अपराधियों ने घर बैठे शेयर ट्रेडिंग से बंपर मुनाफा कमाने का झांसा दिया और धीरे-धीरे कर उनसे कुल 11.67 लाख रुपये की बड़ी ठगी की वारदात को अंजाम दे डाला. पीड़ित को जब अपनी भूल का अहसास हुआ, तब तक उनके बैंक खाते पूरी तरह साफ हो चुके थे. पीड़ित ने पटना साइबर थाने में मामला दर्ज करवा दिया है.
मोबाइल पर आया मैसेज, फिर व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर की जालसाजी
जानकारी के अनुसार, अपराधियों ने इस पूरी ठगी को तकनीकी नेटवर्क के जरिए अंजाम दिया. शातिरों ने सबसे पहले अभिमन्यू कुमार के मोबाइल फोन पर ऑनलाइन ट्रेडिंग कर घर बैठे लाखों कमाने का एक लुभावना मैसेज भेजा था. जब पीड़ित ने इस पर अपनी हामी भरी, तो अपराधियों ने उन्हें तुरंत एक कस्टमाइज्ड ग्रुप से जोड़ दिया, जहां निवेश से संबंधित भ्रामक जानकारियां नियमित रूप से शेयर की जाने लगीं.
जब पीड़ित का विश्वास पूरी तरह जम गया, तो ग्रुप के एडमिन और मुख्य मास्टरमाइंड डॉ. अनिल गोयल तथा ओमी सलमा ने उन्हें एक ऑनलाइन ट्रेडिंग ऐप का कस्टमाइज्ड लिंक भेजा. पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि इसी आधिकारिक ऐप के माध्यम से सारा निवेश और आईपीओ का आवंटन सुरक्षित तरीके से किया जाता है.
पैसा डालते ही स्क्रीन पर दिखने लगे 34 लाख रुपये
पीड़ित अभिमन्यू कुमार ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि ऐप इंस्टॉल करने के बाद उन्होंने प्राथमिक स्तर पर कुछ पैसे लगाए, तो उन्हें रकम से कहीं अधिक मूल्य का फर्जी आईपीओ (IPO) अलॉट कर दिया गया. इससे उनका हौसला बढ़ गया और उन्होंने टुकड़ों में कुल 11.67 लाख रुपये का निवेश कर दिया. निवेश करते ही ऐप के डिजिटल डैशबोर्ड पर उनकी रकम तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 34 लाख रुपये प्रदर्शित होने लगी. इस बंपर मुनाफे को देखकर जब अभिमन्यू ने डॉ. अनिल गोयल और ओमी सलमा से उस स्टॉक को तुरंत बेचकर कैश वापस ट्रांसफर करने को कहा, तो दोनों आरोपियों ने मना कर दिया.
टालने लगे थे आरोपी, साइबर विंग ने IP एड्रेस ट्रैकिंग की शुरू
पीड़ित ने जब भी अपने पैसे वापस पाने के लिए दबाव बनाया, तो आरोपी कुछ न कुछ तकनीकी खराबी या टैक्स जमा करने का बहाना बनाकर बात को टालते रहे.
अंततः पीड़ित को समझ आ गया कि वे एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी के जाल में फंस चुके हैं, जिसके बाद उन्होंने बिना देरी किए पटना साइबर थाना पुलिस से गुहार लगाई.
इस संबंध में साइबर थाना प्रभारी के निर्देश पर मामले की वैज्ञानिक जांच शुरू कर दी है. पुलिस की तकनीकी टीम आरोपियों के कथित व्हाट्सएप नंबरों, डॉ. अनिल गोयल और ओमी सलमा के बैंक खातों तथा फर्जी ऐप के सर्वर आईपी एड्रेस को ट्रैक करने में जुट गई है ताकि अपराधियों को दबोचा जा सके.
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