पशुपति पारस ने NDA से गठबंधन तोड़ने का किया ऐलान, क्या चुनाव से पहले थामेंगे महागठबंधन का हाथ

NDA: पशुपति पारस ने बिहार सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा, "यह सरकार दलित विरोधी है, यहां भ्रष्टाचार चरम पर है और बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता." उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से यह मांग भी की कि स्वर्गीय रामविलास पासवान को भारत रत्न सम्मान दिया जाये और बिहार सरकार बैकलॉग की भरपाई करे.

NDA: बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) की ओर से पटना के बापू सभागार में संकल्प सम्मेलन का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में रालोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस, पूर्व सांसद प्रिंस पासवान, संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष सूरजभान सिंह सहित पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे. पारस ने यह भी स्पष्ट किया कि अब वे NDA गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं. उन्होंने कहा, “आज से मेरा एनडीए से कोई संबंध नहीं रहा. अब हम ‘चलो गांव, बिहार की ओर’ अभियान के तहत पूरे राज्य का भ्रमण करेंगे और जनता को सत्ता परिवर्तन के लिए जागरूक करेंगे.”

चिराग की पार्टी के कार्यकर्त्ता पर लगाया आरोप

पशुपति पारस ने औरंगाबाद की घटना का भी जिक्र किया, जिसमें लोजपा (रा) के एक कार्यकर्ता के बेटे द्वारा कोमल पासवान को गाड़ी से कुचलने का आरोप लगाया गया. पारस ने कहा कि सरकार इस मामले में चुप बैठी है, जो उसके दलित विरोधी रवैये को दर्शाता है.

सभी सीट पर चुनाव लड़ने में सक्षम – पारस

चुनाव से पहले पारस विपक्षी गुट में शामिल होंगे या नहीं इस पर उन्होंने कुछ नहीं कहा. फरवरी महीने में उन्होंने कहा यह कि हमारा संगठन मजबूत है. हम सभी 243 सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारने का माद्दा रखते हैं.

वक्फ बिल पर मुस्लिम के साथ पारस

वक्फ बिल पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह मुस्लिम समुदाय के साथ अन्याय है और रालोजपा इस बिल का विरोध करती है. शराबबंदी पर उन्होंने कहा कि पार्टी इसका विरोध नहीं करती, लेकिन गरीबों को जेल में बंद करना गलत है. उन्होंने मांग की कि गरीब कैदियों को रिहा किया जाए और ताड़ी पर लगे प्रतिबंध को हटाया जाए. सम्मेलन के दौरान प्रसिद्ध गायक आलोक पासवान ने रालोजपा की सदस्यता ग्रहण की.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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