बिहार में हिंसा का शिकार बन रही महिलाओं को अब मदद या इंसाफ के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा. सरकार ऐसे पीड़ित महिलाओं के लिए अब नये इंतजाम करने जा रही है. जिसमें एक ही भवन के अंदर अब तमाम सहायता उपलब्ध कराए जाएंगे. समाज कल्याण विभाग बिहार के 11 जिलों में वन स्टॉप सेंटर खोलने की तैयारी में जुट चुका है. नये सेंटरों के लिए जमीन चिन्हित करने का निर्देश इन जिलों के डीएम को विभाग की ओर से मिला है.
क्या है वन स्टॉप सेंटर?
बिहार में किसी भी तरह की हिंसा से पीड़ित महिलाओं को सरकार वन स्टॉप सेंटर बनाकर सहूलियत देगी. हिंसा से पीड़ित महिलाओं या किशोरियों को एक ही छत के नीचे कानूनी सलाह, पुलिस, स्वास्थ्य संबंधित सहायता इसके तहत उपलब्ध करायी जाएगी. वर्तमान में लगभग सभी जिलों में यह सेंटर चल रहा है लेकिन अब नये भवन बनाए जा रहे हैं और एक ही छत के नीचे तमाम सहायता उपलब्ध करायी जाएगी.
घरेलू हिंसा के मामले सबसे अधिक आ रहे
इस वन स्टॉप सेंटर में किसी भी तरह की हिंसा से पीड़ित महिलाएं या किशोरी आकर मदद ले सकेंगी. उन मामलों की छानबीन की जिम्मेदारी भी बन स्टॉप सेंटर की ही होगी. पिछले साल कुल 8000 से अधिक हिंसा से जुड़े मामले आए थे. जिसमें 6000 से अधिक का निबटारा भी हुआ. आंकड़े बताते हैं कि घरेलू हिंसा के मामले महिलाओं के सामने अधिक आते हें. दहेज, बलात्कार, तस्करी, बाल विवाह, दूसरी शादी या दफ्तर में छेड़खानी के मामले अधिक आए हैं.
प्रभात खबर प्रीमियम स्टोर पढ़ें: Mughal Empire : दुष्ट चंगेज खां और तैमूर के वंशज थे मुगल, आश्रय की तलाश में भारत आया था बाबर
इन 11 जिलों के डीएम को मिले निर्देश…
बिहार में समाज कल्याण विभाग अभी 11 जिलों में वन स्टॉप सेंटर का नया भवन तैयार करेगा. मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद, कटिहार, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, कैमूर, मधुबनी, रोहतास, जमुई और गया के डीएम को अपने जिले में इस सेंटर के लिए जमीन चिन्हित करने के लिए निर्देश मिला है.
