थेथरई की सीमा पार की, तब जाकर मिला मुकाम' 'पंचायत' फेम बुल्लू कुमार ने बताया - Oh My Dog फिल्म बिहार में कैसे बनी

बिहारी अभिनेता बुल्लू कुमार ने अपनी नई फिल्म 'ओह माय डॉग' के सेट से अपने संघर्ष और 250 बेजुबानों के साथ शूटिंग के अनोखे अनुभव साझा किए हैं. फिल्म में एक बड़े किडनी रैकेट का खुलासा दिखाया गया है.

Oh My Dog Shooting In Patna: पटना. वेब सीरीज ‘पंचायत’ में ‘माधव’ का यादगार किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाले बिहारी अभिनेता बुल्लू कुमार इन दिनों अपनी नई मिस्ट्री-ड्रामा फिल्म ‘ओह माय डॉग’ को लेकर चर्चा में हैं. अमित राय के निर्देशन में बनी इस फिल्म में इंसान और बेजुबानों के भावुक रिश्ते के साथ एक बड़े किडनी रैकेट के भंडाफोड़ की कहानी दिखाई गई है. फिल्म में बुल्लू कुमार अहम भूमिका में हैं. उनके साथ पंकज त्रिपाठी, राजेश कुमार, माही राय और गीता अग्रवाल शर्मा सहित कई कलाकार नजर आ रहे हैं.

फिल्म के प्रमोशन के सिलसिले में प्रभात खबर के न्यूजरूम पहुंचे बुल्लू कुमार ने अपने करीब 10 साल के रंगमंच और सिनेमाई सफर पर खुलकर बात की. उन्होंने आर्थिक तंगी से लेकर लगातार संघर्ष करने तक के अनुभव साझा किए. अभिनेता ने बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान बिहार में करीब 250 बेजुबानों के साथ काम किया गया और करीब 20 दिनों तक एम्बुलेंस के जरिए उनके लिए खाना पहुंचाया गया. अपने संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक्टिंग के जुनून में उन्होंने ‘थेथरई’ की सारी सीमाएं पार कर दी थीं.

किडनी माफिया के किरदार में नजर आएंगे बुल्लू कुमार

‘ओह माय डॉग’ में बुल्लू कुमार एक किडनी माफिया का किरदार निभा रहे हैं. फिल्म की कहानी दो अलग-अलग घटनाओं के जरिए आगे बढ़ती है. असम में एक बच्चा अपने खोए हुए कुत्ते को ढूंढ रहा है, जबकि पटना में एक वफादार कुत्ता अपने गायब मालिक की तलाश करता है. दोनों की तलाश आगे चलकर एक बड़े किडनी रैकेट का खुलासा करती है.

अमित राय के निर्देशन में बनी यह फिल्म बेजुबानों के प्रति संवेदनशीलता और थ्रिलर कहानी का मेल है. बुल्लू कुमार के मुताबिक फिल्म में भावनात्मक जुड़ाव के साथ सस्पेंस भी है, जो इसे बाकी फिल्मों से अलग बनाता है.

अटल पथ से कारगिल चौक तक पटना में हुई शूटिंग

फिल्म की शूटिंग पटना के कई चर्चित इलाकों में हुई है. अटल पथ, गंगा पथ, भीखना पहाड़ी, मीठापुर और कारगिल चौक के आसपास फिल्म के कई दृश्य शूट किए गए हैं. वीणा सिनेमा के पास स्थित एक बिल्डिंग में स्टंट सीन भी फिल्माए गए.

बुल्लू कुमार के लिए पटना नया शहर नहीं है. वह करीब 10 साल तक यहां रह चुके हैं. ऐसे में पटना की गलियों में शूटिंग करना उन्हें अपने घर जैसा लगा. हालांकि भीखना पहाड़ी जैसे व्यस्त इलाकों में शूटिंग के दौरान छात्रों की भीड़ के कारण टीम को क्राउड मैनेजमेंट की चुनौती का सामना करना पड़ा.

250 बेजुबानों के साथ शूटिंग, 20 दिन एम्बुलेंस से पहुंचाया खाना

‘ओह माय डॉग’ की शूटिंग के दौरान करीब 250 बेजुबानों के साथ काम किया गया. जानवरों के साथ शूटिंग करना पूरी टीम के लिए अलग अनुभव रहा. उनके खाने और दूसरी जरूरतों का भी खास ध्यान रखना पड़ा.

करीब 20 दिनों तक एम्बुलेंस के जरिए इन बेजुबानों के लिए खाना पहुंचाया गया. शूटिंग के दौरान टीम को उनके साथ काफी सावधानी और संवेदनशीलता से काम करना पड़ा, क्योंकि फिल्म की कहानी में इन जानवरों की भूमिका बेहद अहम है.

बिहार में फिल्म शूटिंग का माहौल पहले से बेहतर

बुल्लू कुमार का कहना है कि बिहार में फिल्मों की शूटिंग को लेकर अब स्थितियां काफी बदली हैं. सरकार की नई फिल्म नीति के कारण शूटिंग की अनुमति और प्रशासनिक सहयोग पहले के मुकाबले आसान हुआ है.

उनके मुताबिक थोड़ी परेशानी अब भीड़ को संभालने में होती है. बिहार के युवाओं में फिल्मों और कलाकारों को लेकर काफी उत्साह है. हालांकि संसाधनों की बात करें तो पटना अब देश के किसी भी बड़े शहर से पीछे नहीं है. यहां फिल्म निर्माण की काफी संभावनाएं हैं.

पांचवीं क्लास में ही बदल लिया था नाम

बुल्लू कुमार का असली नाम बचपन में चंद्रशेखर था. उन्होंने बताया कि गांव में बाहर से आने वाली चिट्ठियों पर लिखे नाम कई बार ग्रामीण पहचान नहीं पाते थे. उन्हें डर लगा कि कहीं डाकिया उनकी चिट्ठी भी वापस न कर दे.

इसी सोच के साथ उन्होंने पांचवीं क्लास में ही अपना नाम सरकारी कागजों में भी बुल्लू कुमार करवा लिया. उनका मानना था कि काम अच्छा होगा तो नाम अपने आप बड़ा हो जाएगा. नाम में क्या रखा है.

आर्थिक तंगी के बीच जारी रखा एक्टिंग का संघर्ष

बुल्लू कुमार ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि एक समय आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि बच्चों की फीस तक भरना मुश्किल हो जाता था. इसके बावजूद उन्होंने एक्टिंग का रास्ता नहीं छोड़ा.

वह कहते हैं कि एक्टिंग के जुनून में उन्होंने ‘थेथरई’ की सारी सीमाएं पार कर दी थीं. लगातार मेहनत और कोशिश करते रहने का नतीजा रहा कि उन्हें आगे बढ़ने के मौके मिले. ‘ग्रहण’ और ‘पंचायत’ उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुईं. इन सीरीज ने उन्हें दर्शकों के बीच पहचान दिलाई.

भोजपुरी सिनेमा में अच्छे लेखन और निर्देशन की जरूरत

भोजपुरी सिनेमा को लेकर बुल्लू कुमार का मानना है कि यहां प्रतिभाशाली कलाकारों की कमी नहीं है. समस्या अच्छे और स्किल्ड डायरेक्टर्स और राइटर्स की कमी से जुड़ी है.

उनके मुताबिक एक कलाकार से उसका बेहतर काम निकालने में निर्देशक की बड़ी भूमिका होती है. अच्छे बजट के साथ उम्दा लेखन और कुशल निर्देशन का मेल जरूरी है. जब ये चीजें एक साथ आएंगी, तभी भोजपुरी सिनेमा के दर्शक दोबारा बड़ी संख्या में थिएटर और बॉक्स ऑफिस की ओर लौटेंगे.

पंकज त्रिपाठी से मिला बड़े भाई जैसा मार्गदर्शन

‘ओह माय डॉग’ में पंकज त्रिपाठी के साथ काम करने के अनुभव को भी बुल्लू कुमार ने खास बताया. उन्होंने कहा कि पंकज भैया उनके लिए बड़े भाई जैसे हैं. सेट पर काम करने के अलावा वह इंडस्ट्री के सिस्टम को समझने में भी मार्गदर्शन करते हैं.

बुल्लू कुमार का कहना है कि किसी कलाकार को सिर्फ सिफारिश के आधार पर रोल नहीं मिल सकता. कास्टिंग हमेशा किरदार की जरूरत के हिसाब से होती है. लेकिन पंकज त्रिपाठी जैसे वरिष्ठ कलाकार का साथ और मार्गदर्शन नए कलाकार के लिए बहुत बड़ा संबल होता है. यही अनुभव आगे के सफर में काफी मदद करता है.

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लेखक के बारे में

By हिमांशु देव

हिमांशु देव सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.

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