पटना में बना बिहार का सबसे ऊंचा पंडाल, झारखंड के कारीगरों ने डेढ़ महीने में दिया अंतिम रूप

Navratri 2024: बिहार की राजधानी पटना के संपतचक बाजार में बिहार का सबसे ऊंचा पंडाल बनाया गया है. पंडाल की ऊंचाई 151 और चौड़ाई 80 फीट है. इसे बनाने में पूरे डेढ़ महीने लगे गए हैं. जामताड़ा झारखंड के 15 कारीगरों ने इसे अंतिम रूप दिया है.

Navratri 2024: बिहार की राजधानी पटना के संपतचक बाजार में बिहार का सबसे ऊंचा पंडाल बनाया गया है. पंडाल की ऊंचाई 151 और चौड़ाई 80 फीट है. इसे बनाने में पूरे डेढ़ महीने लगे गए हैं. जामताड़ा झारखंड के 15 कारीगरों ने इसे अंतिम रूप दिया है. पंडाल की भव्यता और सुंदरता लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है.

पटना जिला के अलावा पास के सटे अनुमंडल और जिलों से भी लोग इस पंडाल को देखने के लिए आ रहे हैं. इस पंडाल का निर्माण एशिया के बड़े मंदिरों में से एक बेगूसराय के बिहट में स्थित सिद्धपीठ बड़की दुर्गा मंदिर के तर्ज पर किया गया है. दावा किया जाता है कि इससे ऊंचा माता का मंदिर पूरे एशिया में नहीं है. नवरात्र के समय में यहां भी श्रद्धालुओं की भीड़ होती है.

पंडाल बनाने के दौरान कारीगर नहीं करते हैं मांसाहार का सेवन

पंडाल बनाने वाले सभी कारीगर मुस्लिम समाज से आते हैं. ये लोग पंडाल कार्य निर्माण कार्य के दौरान अंडा, मीट, मछली का सेवन नहीं करते हैं. पूरे सात्विकता के साथ पंडाल बनाया जाता है. कारीगरों का कहना है कि पिछले 10 वर्षों से वे लोग पंडाल बनाते आ रहे हैं. इस दौरान हमलोग सात्विकता का पूरा ख्याल रखते हैं.

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वर्ष 1971 से यहां हो रही है पूजा

आयोजकों का कहना है कि पहले यहां सिर्फ गांव हुआ करता था. तब से हमारे पूर्वज यहां पंडाल बनाकर मां की प्रतिमा स्थापित करके पूजा करते आ रहे हैं. वर्ष 1971 से यहां पंडाल बनाया जा रहा है. 40 से 50 गांव के लोग यहां पहुंचते हैं.

30 से 35 लाख खर्च कर बना है पंडाल

आयोजकों ने आगे बताया कि पंडाल बनाने की लागत 30 से 35 लाख रुपए तक है. इस पंडाल की उंचाई लगभग 151 फीट है. जो पूरे बिहार का सबसे ऊंचा पंडाल है. पिछले वर्ष अक्षर धाम मंदिर के तर्ज पर पंडाल बनाया गया था.

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By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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