Lockdown : शब-ए-बरात में घरों में करें इबादत, अपने खालिक और मालिक के सामने रोएं और आंसू बहाएं

कोरोना वायरस के संक्रमण पर काबू पाने को लेकर देश भर में 21 दिनों के लिए लगाये गये लॉकडाउन के दौरान शब-ए-बरात में लॉकडाउन का पालन करते हुए अपने घरों में इबादत करने की अपील की है. बिहार की राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ में स्थित बिहार-झारखंड और ओडिशा के मुसलमानों की सबसे बड़ी संस्था इमारत-ए-शरिया के कार्यवाहक महासचिव मोहम्मद शिबली कासमी ने इस संबंध में पत्र जारी कर घरों में इबादत करने की अपील की है. वहीं, उत्तर प्रदेश के शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी नौ अप्रैल को शब-ए-बरात में आम लोगों को कब्रिस्तानों, दरगाहों और मजारों पर जाने से रोकने के आदेश जारी किये हैं.

पटना / लखनऊ : कोरोना वायरस के संक्रमण पर काबू पाने को लेकर देश भर में 21 दिनों के लिए लगाये गये लॉकडाउन के दौरान शब-ए-बरात में लॉकडाउन का पालन करते हुए अपने घरों में इबादत करने की अपील की है. बिहार की राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ में स्थित बिहार-झारखंड और ओडिशा के मुसलमानों की सबसे बड़ी संस्था इमारत-ए-शरिया के कार्यवाहक महासचिव मोहम्मद शिबली कासमी ने इस संबंध में पत्र जारी कर घरों में इबादत करने की अपील की है. वहीं, उत्तर प्रदेश के शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी नौ अप्रैल को शब-ए-बरात में आम लोगों को कब्रिस्तानों, दरगाहों और मजारों पर जाने से रोकने के आदेश जारी किये हैं.

शब-ए-बरात में लॉकडाउन का पालन करते हुए अपने घरों में करें इबादत

बिहार की राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ में स्थित बिहार-झारखंड और ओडिशा के मुसलमानों की सबसे बड़ी संस्था इमारत-ए-शरिया के कार्यवाहक महासचिव मोहम्मद शिबली कासमी ने इस संबंध में पत्र जारी कर घरों में इबादत करने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि कोरोना वायरस के कारण इस समय देश भर में लॉकडाउन चल रहा है. बिहार में भी लॉकडाउन है. इस बीच, नौ अप्रैल को शब-ए-बरात है. यह इबादत की रात है. पत्र में कासमी ने कहा है कि अल्लाह तआला हम सब को शब-ए-बरात की इबादत करने की तौफीक दें.

नमाज, कुरान का पाठ और प्रार्थनाओं में व्यतीत करें समय

उन्होंने कहा है कि फर्ज की नमाज भी घरों में अदा कर रहे हैं. उसी तरह शब-ए-बरात के मौके पर भी अपने-अपने घरों में इबादत करेंगे. अल्लाह से पूरी दुनिया और पूरे देश के लिए दुआ करेंगे कि अल्लाह तआला इस आफत से सब को उद्धार करें. निजी रूप से अपने-अपने घरों में रह कर जिक्र व अज्कार, नमाज और कुरान का पाठ और प्रार्थनाओं में समय व्यतीत करें. अपने खालिक और मालिक के सामने रोएं, आंसू बहाएं और पापों का पश्चाताप करें.

यूपी वक्फ बोर्ड ने कहा- शब-ए-बरात में लोगों को कब्रिस्तान जाने से रोकें

उत्तर प्रदेश के शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोरोना वायरस संक्रमण के कारण घोषित लॉकडाउन के मद्देनजर आगामी नौ अप्रैल को शब-ए-बरात में आम जनता को कब्रिस्तानों, दरगाहों और मजारों पर जाने से रोकने के आदेश जारी किये हैं. उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसएम शोएब ने मंगलवार को बताया कि बोर्ड ने प्रदेश में सभी सुन्नी वक्फ स्थलों के मुतवल्लियों और प्रबंध समितियों को निर्देश दिया है कि कोरोना वायरस की वजह से घोषित बंद के मद्देनजर शब-ए-बरात के मौके पर आम जनता को कब्रिस्तानों, दरगाहों और मजारों पर जाने से रोकें.

किसी कीमत पर ना हो लॉकडाउन की अवहेलना

उन्होंने कहा कि मुतवल्ली आम लोगों को अपने-अपने घरों में ही इबादत करने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि बंद की किसी भी कीमत पर अवहेलना ना हो. इन निर्देशों का पालन करना सभी मुतवल्लियों और प्रबंध समितियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी. शोएब ने एक अन्य आदेश में सुन्नी वक्फ संपत्तियों के मुतवल्लियों और प्रबंध समितियों से यह भी कहा कि वे खासतौर पर पैदल अपने गंतव्य की ओर लौट रहे भूखे-प्यासे लोगों को खाने-पीने की चीजें, दवाएं तथा अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराएं. ऐसा करना सामाजिक, धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है.

सभी शिया वक्फ कब्रिस्तानों को रखें बंद : शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड

उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने भी शब-ए-बरात पर सभी शिया वक्फ कब्रिस्तानों को बंद रखने के आदेश दिये हैं. उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान परिसर में रहनेवाले कर्मचारियों से कहा गया है कि वह कब्रों के ऊपर साफ-सफाई के साथ-साथ उन पर रोशनी भी करें. मालूम हो कि शब-ए-बरात इस्लाम के माननेवाले लोगों के लिए मगफिरत (क्षमा) की रात है, जिसका अपना खास महत्व है. इस मौके पर मुसलमान अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाकर फातिहा पढ़ते और उनकी मगफिरत के लिए दुआ करते हैं.

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Author: Kaushal Kishor

Published by: Prabhat Khabar

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