Patna News : इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में लिवर रोगों के इलाज के लिए आधुनिक हेपेटिक वेनस प्रेशर ग्रेडिएंट (एचवीपीजी) तकनीक की शुरुआत कर दी गई है. इस तकनीक के जरिए अब मरीज के लिवर के भीतर के दबाव का सटीक आकलन कर दवाओं की मात्रा तय की जाएगी, जिससे इलाज अधिक प्रभावी और सुरक्षित होगा. संस्थान में इस प्रक्रिया का खर्च करीब 20 हजार रुपये रखा गया है, जबकि निजी अस्पतालों में इसी जांच और प्रक्रिया पर डेढ़ से दो लाख रुपये तक खर्च आता है.
आईजीआईएमएस के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी और जनरल मेडिसिन विभाग ने इस तकनीक का सफल प्रशिक्षण पूरा करने के बाद इसे नियमित सेवा के रूप में शुरू कर दिया है. शुरुआती चरण में दो गंभीर लिवर रोगियों पर इसका सफल परीक्षण किया गया, जिसके बाद अब सभी जरूरतमंद मरीजों को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी.
सरकारी अस्पताल में पहली बार शुरू हुई सुविधा
आईजीआईएमएस पटना का पहला सरकारी अस्पताल बन गया है, जहां एचवीपीजी जांच और उपचार की सुविधा शुरू हुई है. इससे पहले मरीजों को इस जांच के लिए दिल्ली, अन्य महानगरों या पटना के निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था.
दो मरीजों पर सफल रहा प्रयोग
संस्थान में पटना निवासी 40 और 45 वर्ष के दो मरीजों पर इस तकनीक का सफल उपयोग किया गया. दोनों मरीज पीलिया, पेट में पानी भरने (एसाइटिस) और खून की उल्टी जैसी गंभीर समस्याओं से पीड़ित थे. लंबे समय तक अत्यधिक शराब सेवन के कारण उनका लिवर गंभीर रूप से प्रभावित हो चुका था. गैस्ट्रो विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार झा की देखरेख में दोनों का सफल इलाज किया गया.
जांच से तय होगी इलाज की सही दिशा
गैस्ट्रो विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार झा ने बताया कि एचवीपीजी तकनीक लिवर सिरोसिस, पोर्टल हाइपरटेंशन और बार-बार खून की उल्टी जैसी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए बेहद उपयोगी है. इस जांच से यह पता लगाया जा सकेगा कि मरीज को केवल दवाओं से लाभ मिलेगा या भविष्य में लिवर ट्रांसप्लांट जैसी जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता पड़ सकती है. इससे मरीजों का उपचार अधिक वैज्ञानिक और सटीक तरीके से किया जा सकेगा.
