बिहार की नदियों को जोड़ने का महाअभियान, कोसी-मेची लिंक से बदलेगी चार जिलों की सूरत

Kosi Mechi River Link: कोसी-मेची नदी जोड़ परियोजना पर काम शुरू हो चुका है, लेकिन जमीन अधिग्रहण बड़ी बाधा बना है. 2029 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है. योजना से चार जिलों में 2.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा मिलेगी और बाढ़ नियंत्रण में भी मदद होगी.

Kosi Mechi River Link: बिहार में नदियों को आपस में जोड़ने की राह में जमीन की कमी एक बड़ा रोड़ा साबित हो रही है. कोसी-मेची लिंक परियोजना पर 2004 से चर्चा हो रही थी. उसे पिछले साल केंद्र सरकार से हरी झंडी मिली और इस साल काम शुरू हुआ. विभाग का लक्ष्य इसे मार्च 2029 तक पूरा करने का है. इसका मतलब है कि किसानों को सिंचाई और बाढ़ से राहत के लिए अभी कम से कम तीन साल और सब्र करना होगा.

क्या है वर्तमान स्थिति?

इस प्रोजेक्ट के लिए फिलहाल करीब 40 फीसदी जमीन उपलब्ध है. पहले चरण का काम शुरू हो चुका है. इसके तहत सुपौल जिले में गाद हटाने और पुरानी नहरों के हेड रेगुलेटर और साइफन को दोबारा बनाने का काम चल रहा है. दूसरे चरण के लिए बाकी 60 फीसदी जमीन जुटाने की प्रक्रिया जारी है. इस पूरी योजना पर करीब 6282 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसमें से 60 फीसदी रकम केंद्र सरकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत दे रही है.

सीमांचल को मिलेगा जबरदस्त फायदा

इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा लाभ अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जिले के किसानों को होगा. कोसी नदी में जब बाढ़ के समय फालतू पानी आएगा तो उसे नहर के जरिए मेची नदी में भेज दिया जाएगा. इससे करीब 2.14 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि की सिंचाई हो सकेगी. वर्तमान में जो कोसी मुख्य नहर है. उसकी लंबाई 41 किमी से बढ़ाकर 117 किमी की जाएगी ताकि पानी किशनगंज के आखिरी छोर तक पहुंच सके.

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18 प्रखंडों की बदलेगी किस्मत

इस योजना से कुल 18 प्रखंडों के किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा. अररिया के फारबिसगंज, जोकीहाट और पलासी से लेकर पूर्णिया के बायसी-अमौर और कटिहार के मनिहारी और कदवा तक नहरों का पानी पहुंचेगा. इससे न सिर्फ खरीफ और रबी की फसलों को नया जीवन मिलेगा, बल्कि हर साल कोसी की बाढ़ से होने वाली बर्बादी भी काफी हद तक कम हो जाएगी.

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Published by: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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