Bihar Politics: बिहार विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को बहस का विषय कुछ अलग रहा. सदन में लाई, लड्डू, तिलकुट और रसगुल्ले पर चर्चा छिड़ी तो माहौल हल्का हो गया. सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य अपने-अपने क्षेत्र की मशहूर मिठाइयों को जीआई टैग दिलाने की मांग करने लगे. ठहाकों के बीच सरकार ने प्रक्रिया आगे बढ़ाने का भरोसा दिया.
खोबी लाई पर उठी सबसे पहले आवाज
बाढ़ से भारतीय जनता पार्टी के विधायक सियाराम सिंह ने खोबी लाई को जीआई टैग दिलाने की मांग की. उन्होंने कहा कि यह मिठाई सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि क्षेत्र की पहचान है. दशकों से स्थानीय कारीगर इसे पारंपरिक तरीके से बनाते आ रहे हैं. इसे कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए.
मंत्री दिलीप जायसवाल का जवाब
उद्योग मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने खोबिया लाई के लिए आवेदन Geographical Indications Registry को भेज दिया है. मामला फिलहाल लंबित है. उन्होंने कृषि विभाग से स्मरण पत्र भेजने का आग्रह किया. रिपोर्ट मिलते ही आगे की कार्रवाई होगी.
मंत्री ने हंसते हुए कहा कि वह जब भी उस इलाके से गुजरते हैं, खोबी लाई जरूर खाते हैं. उन्होंने बताया कि राज्य के कई उत्पाद पहले ही जीआई टैग पा चुके हैं. इनमें शाही लीची, कतरनी चावल, जर्दालु आम, मगही पान, मिथिला मखाना, मर्चा चावल, मधुबनी पेंटिंग और भागलपुर सिल्क शामिल हैं.
तिलकुट और रसगुल्ले पर चुटकी
जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने गयाजी के तिलकुट को भी जीआई टैग दिलाने की बात कही. मंत्री विजय चौधरी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि आसन आवेदन नहीं करता, निर्देश देता है. सदन में ठहाके गूंज उठे.
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने भी चुटकी ली. उन्होंने कहा कि मंत्री रसगुल्ला और लाई खाते हैं, पर पहल कम करते हैं. इस पर जायसवाल ने जवाब दिया कि आज तक उन्हें रसगुल्ला खिलाया ही नहीं गया. आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने मनेर के लड्डू को भी जीआई टैग दिलाने की मांग की.
लगेगी मिठाइयों की प्रदर्शनी
बहस के बीच सुझाव आया कि विधानसभा परिसर में बिहार की प्रसिद्ध मिठाइयों की प्रदर्शनी लगाई जाए. बसंत उत्सव के दौरान ऐसा आयोजन करने पर विचार हो सकता है. अध्यक्ष ने 25 फरवरी को इस पहल पर चर्चा की बात कही.
मिठास भरी इस बहस ने राजनीतिक माहौल को कुछ देर के लिए हल्का कर दिया. साथ ही स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की गंभीर पहल भी सामने आई.
