LPG Gas: एलपीजी गैस की सप्लाई में होने वाली दिक्कतों और कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रशासन ने अब कमान ग्राहकों के हाथ में सौंप दी है. अक्सर देखा जाता है कि कुछ गैस एजेंसियां डिलीवरी में हफ्तों लगा देती हैं. ऐसी स्थिति में अब आपको परेशान होने या एजेंसी के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है. आप एलपीजी पोर्टेबिलिटी के जरिए अपना वेंडर बदल सकते हैं.
कैसे काम करती है यह सुविधा?
इंडेन, भारत पेट्रोलियम और एचपी गैस के उपभोक्ता अपनी कंपनी के मोबाइल ऐप या आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर लॉगिन कर सकते हैं. इसके लिए आपको सिर्फ अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और कंज्यूमर आईडी की जरूरत होगी. वहां आपको डिस्ट्रीब्यूटर पोर्टेबिलिटी (Distributor Portability) का ऑप्शन चुनना होगा.
पसंद की एजेंसी चुनना हुआ आसान
जैसे ही आप पोर्टेबिलिटी का विकल्प चुनेंगे, आपके इलाके में मौजूद अन्य सभी गैस एजेंसियों की लिस्ट खुल जाएगी. आप रेटिंग और अपनी सुविधा के अनुसार नई एजेंसी का चुनाव कर सकते हैं. खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए आपको कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना होगा. चयन करने के बाद आपके मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा. इसे भरते ही आपका रिक्वेस्ट दर्ज हो जाएगा.
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सब्सिडी और नंबर पर नहीं पड़ेगा असर
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि एजेंसी बदलने पर न तो आपका कंज्यूमर नंबर बदलेगा और न ही आपकी सब्सिडी में कोई रुकावट आएगी. सब कुछ पहले जैसा ही रहेगा, बस आपकी गैस एजेंसी बदल जाएगी. इस नई व्यवस्था से एजेंसियों के बीच अच्छी सर्विस देने की होड़ मची है. इसका सीधा फायदा आम जनता को मिल रहा है.
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