Death Certificate: बिहार में नई व्यवस्था के तहत 24 घंटे में ही ई-मेल, व्हाट्सएप या फिर एप के जरिए डेथ सर्टिफिकेट मिल जाएगा. बिहार के गांवों में इस व्यवस्था से लोगों को सहूलियत मिल सकेगी. इस व्यवस्था को इसलिए लाया गया है ताकि पारदर्शी और समय पर मृत्यु के रजिस्ट्रेशन और सर्टिफेकेट को जारी किया जा सके.
वार्ड सदस्य को सौंपी गई ये जिम्मेदारी
पंचायती राज विभाग की ओर से वार्ड सदस्य को जिम्मेदारी सौंपी गई है. कब्रिस्तान, श्मशान घाट, मोक्ष धाम, शवदाह गृह का प्रभारी वार्ड सदस्य को बना दिया है. अंत्येष्टि के बाद वार्ड सदस्य प्रारूप (डेटा) पंचायत सचिव-सह-रजिस्ट्रार को देंगे. बिहार के गांव इलाके में लोगों को डेथ सर्टिफिकेट के लिए काफी परेशानी झेलनी पड़ती थी. लेकिन अब उन्हें ऑफिस के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. साथ ही पंचायत के अधिकारियों के पास सही डेटा भी रिजर्व रहेगा.
क्यों जरूरी है डेथ सर्टिफिकेट?
जानकारी के मुताबिक, बीमा दावा, पेंशन, संपत्ति उत्तराधिकार समेत अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए डेथ सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ती है. पहले सर्टिफिकेट के लिए 21 दिनों का इंतजार करना पड़ता था. लेकिन अब 24 घंटे के अंदर ही फोन पर मिल सकेगा. ऑफिस के बाहर लोगों की लंबी लाइन से भी छुटकारा मिलेगा.
कहां से ले सकेंगे सर्टिफिकेट
गौर करने वाले वाली बात यह भी है कि अब डेथ सर्टिफिकेट के लिए ‘जगह’ का महत्व भी बढ़ गया है. जानकारी के मुताबिक, अगर किसी का निधन गांव में ही हुआ है तो पंचायत सचिव ही सर्टिफिकेट दे देंगे. लेकिन किसी का निधन पंचायत क्षेत्र से बाहर हुआ है तो सर्टिफिकेट के लिए पंचायत नहीं बल्कि जिला ऑफिस जाना पड़ेगा. मृतक के परिजन अगर चाहते हैं तो डेथ सर्टिफिकेट की हार्ड कॉपी पंचायत ऑफिस में भी जाकर ले सकते हैं.
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