Patna News : पटना नगर निगम बोर्ड की छठी विशेष बैठक गुरुवार को मौर्यलोक स्थित मौर्य मंडपम में हंगामेदार रही. आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर निगम की ओर से जारी नोटिस का मुद्दा बैठक में सबसे ज्यादा गरमाया. मेयर सीता साहू की अध्यक्षता में हुई बैठक की शुरुआत ही इस मामले से हुई. हालांकि विशेष बैठक पीआरडीए की संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बुलायी गयी थी.
पार्षदों ने नोटिस भेजने का किया विरोध
पार्षद विनय कुमार पप्पू, आशीष सिन्हा, तरुणा राय, श्वेता रंजन समेत अन्य पार्षदों ने व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नोटिस भेजे जाने का विरोध किया. बैठक में सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव भी मौजूद थे. उनके सामने अधिकतर पार्षदों ने खड़े होकर कहा कि बिना विकल्प दिये नोटिस भेजने से शहर में भय का माहौल है और हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर संकट पैदा हो गया है.
पार्षदों ने मांग की कि जब तक राज्य सरकार की ओर से गठित समिति कोई समाधान नहीं निकालती, तब तक नोटिस और सीलिंग जैसी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगायी जाए.
कमर्शियल टैक्स वसूला, अब नोटिस क्यों: पार्षद
बैठक शुरू होते ही पार्षद विनय कुमार पप्पू ने सवाल उठाया कि क्या शहर में रोजगार चलाना अपराध है. उन्होंने कहा कि निगम लंबे समय से व्यावसायिक गतिविधियों पर टैक्स वसूलता रहा है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर लोगों को नोटिस भेजा जा रहा है.
पार्षद आशीष सिन्हा और तरुणा राय ने भी कहा कि जब कमर्शियल टैक्स की वसूली की जा रही थी, तब निगम की ओर से आपत्ति नहीं की गयी. अब अचानक नोटिस भेजे जाने से आम लोगों में डर का माहौल है. पार्षदों ने एकजुट होकर तत्काल सीलिंग और नोटिस कार्रवाई रोकने की मांग की.
26,714 व्यावसायिक संपत्तियां चिह्नित, 19,600 को नोटिस
नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के देशव्यापी निर्देश के तहत 2031 मास्टर प्लान और जियो स्पेशियल डेटा के आधार पर मैपिंग करायी गयी है. इसमें शहर में करीब 26 हजार 714 व्यावसायिक संपत्तियां चिह्नित हुई हैं और 19 हजार 600 लोगों को नोटिस भेजा गया है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि नोटिस का मतलब तत्काल सीलिंग या विस्थापन नहीं है. सभी कार्यपालक अधिकारियों को सुनवाई की शक्ति दी गयी है, ताकि संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिल सके.
सरकार गंभीर, जल्द निकलेगा व्यावहारिक समाधान: रामकृपाल
बैठक में शामिल सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने पार्षदों की चिंताओं का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि सरकार जनता की परेशानी से अवगत है. विधायकों की पहल पर उपमुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गयी है.
उन्होंने कहा कि कमेटी जल्द बैठक कर जनहित और अदालत के आदेश के बीच व्यावहारिक रास्ता निकालने का प्रयास करेगी. पटना समेत राज्य के सभी नगर निकायों के व्यापारियों और मकान मालिकों को राहत देने के लिए सरकार गंभीर है और जल्द ठोस विकल्प निकाला जाएगा.
3631 पीआरडीए संपत्तियां फ्री-होल्ड करने के प्रस्ताव पर मुहर
हंगामे के बीच बोर्ड ने वर्ष 2019 से लंबित पीआरडीए संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. प्रस्ताव के तहत राजेंद्र नगर, श्रीकृष्णापुरी, कंकड़बाग, मौर्यलोक, परिवहन नगर और बेउर की 432.07 एकड़ जमीन में फैली 3631 संपत्तियों को मालिकाना हक देने का रास्ता साफ होगा.
इनमें 1367 भूखंड, 806 भवन, 841 फ्लैट, 575 दुकानें, 37 कार्यालय, चार अतिथिशाला और एक ईंट भट्ठा शामिल हैं. विभाग और कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद संपत्ति धारकों को लीज से मुक्ति मिलेगी और वे अपनी संपत्ति को आसानी से बेच या ट्रांसफर कर सकेंगे.
308 खाली संपत्तियों के मुद्दे पर भी हंगामा
वार्ड 38 के पार्षद आशीष सिन्हा ने संलेख में शामिल खाली भूखंडों और संपत्तियों का मामला उठाया. विभिन्न क्षेत्रों में ऐसी 308 संपत्तियां हैं, जो अब तक आवंटित नहीं हुई हैं या खाली पड़ी हैं. इनमें एक संपत्ति पर अतिक्रमण का भी उल्लेख किया गया है.
मामला उठते ही सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों ने इसका विरोध शुरू कर दिया और प्रस्ताव पारित करने की बात कही. इसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया.
सर्किल रेट के आधार पर होगा शुल्क का निर्धारण
फ्री-होल्ड नीति के तहत शुल्क का निर्धारण सर्किल रेट के आधार पर किया जाएगा. मूल आवंटी या उनके कानूनी वारिस को अद्यतन एमवीआर का 10 प्रतिशत और द्वितीय आवंटी यानी खरीदार को 12 प्रतिशत परिवर्तन शुल्क देना होगा. फ्री-होल्ड होने के बाद भी संपत्ति धारकों को नियमित भू-लगान देना होगा.
संपत्ति धारकों को बैक लोन लेने में होगी सहूलियत
बियाडा और आवास बोर्ड की तर्ज पर तैयार नीति से संपत्ति धारकों को बैंक लोन लेने और नामांतरण में सहूलियत होगी. वहीं नगर निगम को एकमुश्त राजस्व मिलने की उम्मीद है. बैठक में डिप्टी मेयर रेशमी चंद्रवंशी, सशक्त स्थायी समिति के सदस्य, अपर नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त और पार्षद समेत अन्य मौजूद रहे.
