Chirag Paswan: पशुपति पारस ने सबके सामने चिराग पासवान पर दिया विवादित बयान, लगाए गंभीर आरोप

Chirag Paswan: चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस ने उनपर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि जब रामविलास पासवान अस्पताल में थे तब चिराग ने उनके परिवार को मिलने नहीं दिया.

Chirag Paswan: पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने अपने भतीजे चिराग पासवान पर आपतिजनक टिप्पणी की है. उन्होंने कहा, ‘इसके कारण बड़े भाई को अंतिम समय में नहीं देख पाया. कोरोना की वजह बताकर मुझे और मेरे परिवार के किसी भी सदस्य को बड़े भाई साहब से मिलने नहीं दिया गया. जबकि अंतिम समय में बड़े भाई रामविलास पासवान परिवार के सभी लोगों को खोज रहे थे. जो जैसा करेगा, वैसा फल मिलेगा.’

कल चिराग ने चाचा को लेकर दिया था बयान

चिराग पासवान ने गुरुवार को पार्टी के स्थापना दिवस पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा था, ‘वह हमारे घर के बड़े-बुजुर्ग हैं. अलग होने का फैसला उन्होंने अकेले ही लिया था, मेरी मां से हर रिश्ते को तोड़ने का फैसला भी उन्हीं ने किया. भविष्य में साथ आना है या नहीं, यह फैसला भी उन्हीं का होगा. मेरे और उनके खून में फर्क है. मैं नहीं मानता आने वाले दिनों में ये चीजें कभी एक हो सकती है.’

कब पड़ी थी पार्टी में फूट

चिराग के पिता रामविलास पासवान का 8 अक्टूबर 2020 को निधन हो गया था. इसके बाद चाचा और भतीजा पार्टी को लेकर अलग-अलग राय रखने लगे. बात बिगड़ती चली गई. 14 जून 2021 को एलजेपी में फूट पड़ गई. पशुपति ने एलजेपी के पांच सांसदों को अपने पक्ष में कर लिया और चिराग को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने की घोषणा कर दी. इसके बाद रामविलास पासवान की लोजपा दो हिस्सों में बंट गई.

पिता के निधन के तुरंत बाद घटी इस घटना के बाद चिराग अकेले पड़ गए. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने धैर्य बनाये रखा और पार्टी को मजबूत करने में लगे रहे. समय का चक्र बदला और 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए ने चिराग पासवान को पांच सीटें दे दीं और पारस का हाथ खाली रह गया. चिराग की पार्टी ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया और उनके सभी उम्मीदवार चुनाव जीत गए. अब चिराग केंद्र में मंत्री हैं. 15 नवंबर को चिराग को पार्टी का पुराना दफ्तर भी मिल गया.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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