Bihar Tourism: 51 शक्तिपीठों में से एक है पटना का यह मंदिर, यहां गिरा था मां सती का यह अंग...जानिए इसकी रोचक कहानी

Bihar Tourism: पटन देवी मंदिर, जिसे पटनेश्वरी मंदिर भी कहते हैं, बिहार के पटना में स्थित एक प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है. यहां श्रद्धालु दूर-दूर से देवी की पूजा करने आते हैं. मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां देवी सती का दाहिना जंघा गिरा था.

Bihar Tourism: बिहार की राजधानी पटना न केवल राज्य की राजनीतिक राजधानी है, बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण शहर है. यह शहर भारतीय इतिहास में अपनी प्राचीनता और गौरवपूर्ण विरासत के कारण विशेष स्थान रखता है. इतिहास की बात करें तो पटना का प्राचीन नाम पाटलिपुत्र था, जो नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों की तरह प्राचीन शिक्षा और ज्ञान का केंद्र माना जाता था.धार्मिक दृष्टि से भी पटना बहुत खास है. यह शहर विभिन्न धर्मों के लिए पवित्र स्थल है. यहां हिंदू, मुस्लिम और सिख धर्म से जुड़े कई धार्मिक स्थल मौजूद हैं. हिंदू धर्म के मानने वालों के लिए पटन देवी मंदिर (पटनेश्वरी मंदिर) एक महत्वपूर्ण स्थान है. कहा जाता है कि यही वह स्थल है जहां देवी सती का दाहिना जांघ गिरा था, और इसलिए यह मंदिर भक्तों के लिए बहुत खास है.

ये है पूरी कहानी

पटन देवी मंदिर, जिसे पटनेश्वरी मंदिर भी कहा जाता है, बिहार का एक प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है. पुराणों के अनुसार, जब राजा दक्ष प्रजापति ने यज्ञ का आयोजन किया और भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया, तो देवी सती नाराज होकर यज्ञ की अग्नि में कूद गईं और अपना जीवन त्याग दिया. इस घटना से भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने देवी सती का शव लेकर तांडव किया, जिससे पूरा संसार कांपने लगा. तब भगवान विष्णु ने संतुलन बनाने के लिए अपना चक्र चलाया और देवी सती के शरीर को 51 हिस्सों में विभाजित कर दिया. कहा जाता है कि इन 51 हिस्सों में से दाहिना जंघा पटन देवी मंदिर में गिरा, और इसी कारण यह स्थल शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हो गया. तब से यह स्थान पटन देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है और श्रद्धालु दूर-दूर से पूजा-अर्चना करने आते हैं.

ऐसे पहुंचे

चौक थाना क्षेत्र के हाजीगंज से संपर्क पथ से थोड़ी ही दूरी पर अंदर गली में मंदिर है. पटना रेलवे स्टेशन से करीब 8 किलोमीटर दूर है. जहां से ऑटो या कैब बुक करके जाया जा सकता है. इसके अलावा हवाई अड्डे से मंदिर की दूरी 13 किलोमीटर है.

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By JayshreeAnand

कहानियों को पढ़ने और लिखने की रुचि ने मुझे पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. सीखने और समझने की इस यात्रा में मैं लगातार नए अनुभवों को अपनाते हुए खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. वर्तमान मे मैं धार्मिक और सामाजिक पहलुओं को नजदीक से समझने और लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हूं.

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