Bihar STF: बिहार में अवैध हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल और अपराध पर लगाम लगाने के लिए बिहार एसटीएफ ने अभियान शुरू किया है. एसटीएफ के आर्म्स सेल ने पूरे बिहार में सक्रिय 250 बड़े हथियार सप्लायरों और तस्करों की पहचान कर उनकी सूची तैयार की है. इस सूची में10 कुख्यात हथियार तस्कर भी शामिल हैं. इस अभियान का मकसद सिर्फ अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अवैध हथियारों की सप्लाई चेन को जड़ से खत्म करना है.
रखी जा रही खास नजर
बिहार एसटीएफ के डीआईजी संजय कुमार की निगरानी में चल रही इस कार्रवाई में उन लोगों पर खास नजर रखी जा रही है, जो मिनी गन फैक्ट्रियों में हथियार बनाने का काम करते हैं. जांच एजेंसियों का मानना है कि बिहार में होने वाले करीब 90 फीसदी अपराधों में स्थानीय स्तर पर बनी देसी पिस्टल का इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि अब सिर्फ अपराधियों ही नहीं, बल्कि हथियार तैयार करने वाले नेटवर्क को भी निशाने पर लिया गया है.
जांच में क्या सामने आया
एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया है कि बिहार में पिस्टल भले ही लोकल स्तर पर बनाई जाती हो, लेकिन उसके कारतूस बाहर से आते हैं. कोलकाता, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों से कारतूसों की तस्करी कर बिहार पहुंचाई जाती है. अब एसटीएफ की टीमें इन राज्यों तक नेटवर्क खंगाल रही हैं ताकि हथियारों के साथ-साथ गोला-बारूद की सप्लाई भी रोकी जा सके.
कई मामलों में पुलिस की जांच प्रक्रिया कमजोर पड़ने से आरोपियों को राहत भी मिल रही है. मुजफ्फरपुर के पारू थाना क्षेत्र में पकड़ी गई मिनी गन फैक्ट्री इसका बड़ा उदाहरण बनी. यहां गिरफ्तार मुख्य आरोपियों को अदालत से जमानत मिल गई क्योंकि पुलिस समय पर मजबूत केस डायरी और जरूरी साक्ष्य पेश नहीं कर सकी. जब्ती प्रक्रिया में कानूनी नियमों की अनदेखी भी पुलिस पर भारी पड़ी.
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पूरे नेटवर्क को खत्म करने की तैयारी
अब एसटीएफ ने डिजिटल निगरानी को और तेज कर दिया है. सूची में शामिल सभी सप्लायरों की मोबाइल लोकेशन, संपर्क सूत्र और वर्तमान गतिविधियों की बारीकी से जांच हो रही है. हर जिले की पुलिस पुराने हथियार तस्करों और गन फैक्ट्री से जुड़े लोगों का रिकॉर्ड खंगाल रही है. इस अभियान का असली लक्ष्य बिहार में अपराध की रीढ़ माने जा रहे अवैध हथियार नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है.
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