बिहार रेजिमेंट की प्रथम बिहार का 85वां और 47 राष्ट्रीय राइफल्स का 25वां स्थापना दिवस मनाया गया, देखें तस्वीरें

Bihar Regiment Raising Day : बिहार रेजिमेंट ने 15 सितंबर को अपना स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया. प्रथम बिहार बटालियन ने 85 साल पूरे किए, जबकि 47 राष्ट्रीय राइफल्स ने 25 साल का सफर तय किया. यह दिन रेजिमेंट के शौर्य, बलिदान और अटूट राष्ट्रसेवा का प्रतीक है.

Bihar Regiment Raising Day : बिहार रेजिमेंट के लिए 15 सितंबर का दिन गौरव, शौर्य और सैन्य परंपराओं का प्रतीक है. इसी दिन बिहार रेजिमेंट की प्रथम बटालियन प्रथम बिहार का गठन हुआ था. मंगलवार को रेजिमेंट केंद्र दानापुर में प्रथम बिहार का 85वां और 47 राष्ट्रीय राइफल्स (बिहार) का 25वां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया. इस अवसर पर वीर स्मृति स्थल पर राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों की स्मृति में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया.

15 सितंबर 1941 को हुआ था प्रथम बिहार का गठन

प्रथम बिहार की स्थापना 15 सितंबर 1941 को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल जे. आर. एच. द्वीड, एमबीई, एमसी के नेतृत्व में बिहार रेजिमेंट की प्रथम बटालियन के रूप में हुई थी. इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वर्ष 1923 में दानापुर में गठित 11/19वीं हैदराबाद रेजिमेंट से जुड़ी है. इस यूनिट में बिहार के सैनिक शामिल थे और शुरुआती दौर में राजपूत, ब्राह्मण, अहीर और मुस्लिम समुदायों के सैनिकों की भागीदारी रही थी.

युद्ध के दौरान बर्मा में दिखाया अदम्य साहस

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रथम बिहार ने असाधारण साहस और सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया. बर्मा, वर्तमान म्यांमार, में अपने पराक्रम के लिए बटालियन ने हाका और गंगवा युद्ध सम्मान अर्जित किए. स्वतंत्रता के बाद भी यूनिट ने देश के उत्तरी और पूर्वी मोर्चों पर विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.

कारगिल युद्ध में भी निभायी महत्वपूर्ण भूमिका

वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन विजय में भी प्रथम बिहार ने अदम्य साहस का परिचय दिया और विशिष्ट उपलब्धियां हासिल कीं. यूनिट को इस अभियान में थिएटर सम्मान भी प्राप्त हुआ. बटालियन की सैन्य परंपरा में वीरता, अनुशासन और राष्ट्रसेवा को विशेष स्थान प्राप्त है.

'बजरंग बली की जय' है बटालियन का युद्धघोष

प्रथम बिहार का युद्धघोष 'बजरंग बली की जय' है. बटालियन की परंपरा के अनुसार यह युद्धघोष सूबेदार मेजर बिशनदेव सिंह और तत्कालीन कार्यवाहक कमान अधिकारी कप्तान हबीबुल्लाह ने चुना था. तीनमुखी सिंह वाले अशोक स्तंभ को प्रथम बिहार के बैज के रूप में स्वीकृति दिलाने में भी कप्तान हबीबुल्लाह की भूमिका रही. आगे चलकर यही चिन्ह बिहार रेजिमेंट की पहचान और प्रतीक बना.

47 राष्ट्रीय राइफल्स की स्थापना 2001 में हुई

47 राष्ट्रीय राइफल्स (बिहार) की स्थापना 15 सितंबर 2001 को दानापुर छावनी में हुई थी. कठोर प्रशिक्षण और उच्च स्तरीय सैन्य तैयारियों के बाद बटालियन को जम्मू-कश्मीर में तैनात किया गया. पिछले 25 वर्षों में यूनिट ने कश्मीर घाटी में विभिन्न आतंकवाद-रोधी और सैन्य अभियानों में भाग लेते हुए सैन्य दक्षता और अनुशासन का परिचय दिया है.

25 वर्षों में हासिल की कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां

47 राष्ट्रीय राइफल्स ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्र की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के दायित्व का निर्वहन किया है. बटालियन की परिचालन क्षमता और सेवा को समय-समय पर विभिन्न प्रतिष्ठित वीरता एवं सेवा पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है. दोनों बटालियनों की उपलब्धियां बिहार रेजिमेंट की समृद्ध सैन्य विरासत और 'बजरंग बली की जय' के जज्बे को प्रतिबिंबित करती हैं.

कार्यवाहक कमांडेंट ने शहीदों को किया नमन

स्थापना दिवस के अवसर पर वीर स्मृति स्थल पर दोनों बटालियनों के उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया. कर्नल ऑफ द बिहार रेजिमेंट की ओर से रेजिमेंट के कार्यवाहक कमांडेंट कर्नल विजय कुमार ने शहीद सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

सैन्य अधिकारियों और जवानों ने दोहरायी राष्ट्रसेवा की प्रतिबद्धता

समारोह में स्टेशन मुख्यालय के एसएसओ कर्नल श्वेताभ, लेफ्टिनेंट कर्नल अभिषेक कुमार, लेफ्टिनेंट कर्नल अंकुर कुमार मिश्रा, लेफ्टिनेंट कर्नल ए.के. सिंह सहित बिहार रेजिमेंट केंद्र के अन्य सैन्य अधिकारी, जेसीओ और जवान मौजूद रहे. सभी ने वीर शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए राष्ट्र की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी.

वीरता और त्याग की परंपरा को किया याद

स्थापना दिवस समारोह ने बिहार रेजिमेंट की उस गौरवशाली सैन्य परंपरा को फिर स्मरण कराया, जिसमें वीरता, त्याग, कर्तव्य और राष्ट्रसेवा को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है. प्रथम बिहार के 85 वर्ष और 47 राष्ट्रीय राइफल्स के 25 वर्ष का सफर देश की सुरक्षा में समर्पण और सैन्य गौरव की लंबी परंपरा का प्रतीक है.

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By संजय कुमार

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