दानापुर/पटना. पटना में बैठकर अमेरिका और ब्रिटेन सहित कई देशों के नागरिकों को तकनीकी सपोर्ट के नाम पर ठगने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. पटना और मुसल्लहपुर थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दानापुर के गोला रोड स्थित एक फ्लैट में चल रहे अवैध कॉल सेंटर पर छापा मारा. पुलिस ने मौके से फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाले चार एमबीए छात्रों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया है. ये शातिर विदेशी नागरिकों के कंप्यूटर में मालवेयर डालकर डॉलर में रकम वसूलते थे और हवाला के जरिए पैसे भारत मंगाते थे.
रामपुर रोड में वाहन जांच के दौरान खुला राज
इस पूरे अंतरराष्ट्रीय रैकेट का खुलासा शुक्रवार देर रात रामपुर रोड पर वाहन जांच के दौरान हुआ. पुलिस को देखकर एक बाइक सवार युवक तेजी से भागने लगा. पुलिस ने घेराबंदी कर राजीव नगर निवासी अक्षय कुमार साह को दबोच लिया. जब उसके मोबाइल की जांच की गई, तो उसमें अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी, विदेशी नागरिकों के विवरण और संदिग्ध लेन-देन के चैट मिले. पुलिस की कड़ी पूछताछ में उसने गोला रोड स्थित विवेक विहार कॉलोनी के एक फ्लैट में अवैध कॉल सेंटर संचालित होने की बात कबूल कर ली.
पुलिस की दबिश देख जमीन पर पटके लैपटॉप
अक्षय की निशानदेही पर पुलिस टीम ने तुरंत विवेक विहार कॉलोनी स्थित अपार्टमेंट के तीसरे तल्ले पर छापेमारी की. पुलिस के दाखिल होते ही कमरे में हेडफोन लगाकर विदेशी लहजे में बात कर रहे युवकों में हड़कंप मच गया. पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने आनन-फानन में अपने लैपटॉप जमीन पर पटक दिए, जिससे एक डेल लैपटॉप क्षतिग्रस्त हो गया. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दूसरे कमरे में मौजूद युवकों को भी उनके उपकरणों समेत धर दबोचा.
पटना, भोजपुर, सहरसा और औरंगाबाद के रहने वाले हैं आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों में अक्षय कुमार साह (राजीव नगर, पटना), ओम प्रकाश ठाकुर (मूल निवासी महुआ, भोजपुर; वर्तमान निवासी गोला रोड), सत्यम कुमार (मूल निवासी गोलमा, सहरसा; वर्तमान निवासी कांटी फैक्ट्री, कंकड़बाग) और अभिषेक कुमार (मूल निवासी श्रीकृष्ण नगर अहरी, औरंगाबाद; वर्तमान निवासी गोला रोड) शामिल हैं. पुलिस के अनुसार सभी आरोपी उच्च शिक्षित एमबीए छात्र हैं. अंग्रेजी भाषा पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे अमेरिकी व ब्रिटिश लहजे में कॉल कर पीड़ितों को आसानी से अपने जाल में फंसा लेते थे.
मालवेयर डालकर स्लो करते थे सिस्टम, डॉलर में ऐंठते थे रकम
पूछताछ में आरोपियों ने ठगी के तौर-तरीकों का खुलासा किया. गिरोह के सदस्य एसआईपी और वीओआईपी सॉफ्टवेयर के जरिए अंतरराष्ट्रीय कॉल करते थे. वे खुद को टेक सपोर्ट का प्रतिनिधि बताकर विदेशी नागरिकों को कंप्यूटर में खराबी का डर दिखाते थे. इसके बाद पीड़ितों से एपीके या मालवेयर फाइल इंस्टॉल करवाकर उनके कंप्यूटर को धीमा कर देते थे. फिर सिस्टम ठीक करने के नाम पर भारी-भरकम राशि अमेरिकी डॉलर में वसूली जाती थी. बाद में यह रकम यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) और हवाला नेटवर्क के जरिए भारत में कैश कराई जाती थी.
सालाना 80-90 लाख कमाने के बाद शुरू किया खुद का गिरोह
पूछताछ में सामने आया कि ये आरोपी बीते तीन-चार वर्षों से साइबर अपराध में सक्रिय थे. पहले वे किसी अन्य गिरोह के लिए काम करते थे और सालाना करीब 80 से 90 लाख रुपये की कमाई कर गिरोह के सरगना को सौंपते थे. जब उस गिरोह का एक साथी पकड़ा गया, तो ये कुछ दिन भूमिगत रहे और फिर गोला रोड में अपना निजी कॉल सेंटर खड़ा कर लिया. पुलिस ने इनके पास से 4 लैपटॉप, 9 मोबाइल फोन, 7 एटीएम कार्ड, 1.09 लाख रुपये नकद, विदेशी नागरिकों की जीमेल आईडी, निजी दस्तावेज और 2 बाइक बरामद की हैं. पुलिस अब गिरोह के अंतरराष्ट्रीय हवाला संपर्कों को खंगाल रही है.
