Bihar News: बिहार को सिर्फ 6 महीने में मिलेंगे 352 ग्रामीण हॉस्पिटल, जानिए किस जिले में कितने अस्पताल हो रहे तैयार
Bihar News: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है. ऐसे में 23 जिलों में 352 ग्रामीण हॉस्पिटल बनाए जायेंगे. इससे लोगों को बड़ी सुविधा मिल सकेगी. इन अस्पतालों में 126 तरह की फ्री दवाएं भी दी जाएगी.
Bihar News: बिहार में पंचायत स्तर पर तमाम स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों को मिले, इसे लेकर सरकार की तरफ से कई पहल किए जा रहे हैं. इसी क्रम में बिहार में 23 जिलों के अलग-अलग विधानसभा इलाकों में 352 ग्रामीण अस्पताल भवन (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) बनाया जाएगा. राज्य के 23 जिलों के अलग-अलग विधानसभा इलाकों में मरीजों को अब उनकी पंचायत में ही गर्भवती महिलाओं की जांच, डिलीवरी के पहले देखभाल और सुरक्षित डिलीवरी की सेवा मिलेगी.
मिलेंगी ये सभी फैसिलिटी
साथ ही टेली-मेडिसिन के जरिए एक्सपर्ट डॉक्टरों से परामर्श, योग सेशन, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, वैक्सीनेशन, अन्य रूटीन वैक्सीनेशन, स्क्रीनिंग और फॉलो-अप किया जायेगा. इन ग्रामीण अस्पतालों में 126 तरह की फ्री दवाएं भी दी जायेगी. 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा से इन ग्रामीण अस्पतालों का निर्माण विधानसभा इलाकों में कराया जा रहा है.
सिर्फ 6 महीने में तैयार होंगे हॉस्पिटल
बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड की तरफ से अगले 6 महीने के अंदर इन अस्पतालों का निर्माण कराया जाना है. राज्य में सबसे अधिक 55 ग्रामीण अस्पतालों का निर्माण सीवान जिला में होगा. इस जिले के सीवान सदर, दरौंधा, बड़हरिया, महराजगंज में अस्पताल भवनों का निर्माण होगा. इसके अलावा बांका जिले में 28 अस्पतालों, मुजफ्फरपुर जिले में 25 अस्पतालों, दरभंगा में 22, भागलपुर और गया जिले में 21-21 अस्पतालों का निर्माण किया जाएगा.
इसके अलावा अरवल जिला में 11, भोजपुर में 12, बेगूसराय में 10, बक्सर में तीन, गया में 21, जमुई में 10, जहानाबाद में 11, कैमूर में 6, लखीसराय में 12, नालंदा में 8, पूर्णिया में 10, पूर्वी चंपारण में 12, मधेपुरा में 14, मुधुबनी में 10, सारण में 11, सहरसा में 16, वैशाली में 15 और पश्चिम चंपारण जिले में 10 ग्रामीण अस्पतालों को निर्माण कराया जा रहा है. इन अस्पतालों में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और नर्स पूरे कार्यक्रमों का संचालन करेंगे.
स्वास्थ्य विभाग की खास पहल
बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए कई पहल किए जा रहे हैं. इसी क्रम में सरकारी अस्पतालों में ओपीडी व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से विभाग अब यह ट्रैक करेगा कि डॉक्टर मरीज को वास्तविक रूप से कितना समय दे रहे हैं. इसके लिए ओपीडी में इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में बदलाव की तैयारी की जा रही है, ताकि डॉक्टर के चैंबर में बिताए गए समय की अलग से रिकॉर्डिंग हो सके.
